शिमला, अप्रैल 22 — सोमवार रात ठियोगके कुफरी हाइट्स इलाके में दो छोटे हिमालयन काले भालू बच्चे इधर-उधर भटकते देखे गए। आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। ये बच्चे बेचैन नजर आ रहे थे और इनके मां से बिछुड़ जाने की आशंका जताई जा रही थी। शिमला के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर राजेश शर्मा ने बताया कि बच्चों की हालत देखकर तुरंत कार्रवाई जरूरी हो गई थी।
बच्चे बहुत असुरक्षित स्थिति में थे, उनके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी। अधिकारियों ने तुरंत उस इलाके को घेर लिया और टीम को इन्हें सुरक्षित पकड़ने का काम सौंपा, ताकि न तो इन बच्चों को नुकसान पहुंचे और न ही आसपास के लोगों को।
शिमला फॉरेस्ट डिविजन और शिमला पुलिस की संयुक्त टीम ने मिलकर बच्चों को बेहोश किया। फिर उन्हें सावधानी से पकड़कर एक पिंजड़े में रखा गया। इसके बाद उन्हें शिमला चिड़ियाघर ले जाया गया, जहां उनका अस्थायी इलाज किया जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी व्यक्ति या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
शिमला पुलिस के इंस्पेक्टर अनिल ठाकुर ने बताया कि इस ऑपरेशन में दोनों पक्षों की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया था। लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ जानवरों की भलाई को भी प्राथमिकता दी गई।
अधिकारियों का मानना है कि संभवतः ये बच्चे अपने प्राकृतिक आवास से भटक गए हों। इसकी वजह वन क्षेत्र में अतिक्रमण या भोजन की कमी हो सकती है। हिमालयन काले भालू भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित हैं और आमतौर पर हिमाचल प्रदेश के वनों में पाए जाते हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक बढ़ती चिंता
हिमाचल प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। राज्य के वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में ऐसे मामलों में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शहरीकरण के कारण वन क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं, वनों की कटाई हो रही है और जलवायु परिवर्तन के चलते वन्यजीव मानव बस्तियों के करीब पहुंच रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों के विस्तार से ऐसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। हाल ही में कुल्लू से एक तेंदुआ और धर्मशाला के एक स्कूल से हिमालयन मोनाल तीतर को बचाया गया था। अधिकारियों ने लोगों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी शुरू किए हैं, ताकि वे ऐसी घटनाओं की तुरंत सूचना दें और वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें।
दीर्घकालिक समाधान की ओर कदम
हिमाचल प्रदाग वन विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अब ठोस कदम उठा रहा है। इसके तहत वन सीमाओं पर और ज्यादा चेतावनी वाले बोर्ड लगाए जाएंगे। वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नियमित गश्त बढ़ाई जाएगी। शिमला जिले में एक वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, ताकि घायल या अनाथ जानवरों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
लोगों से अपील की जाती है कि वे वन्यजीवों के पास न जाएं और ऐसी घटनाओं की तुरंत वन विभाग को सूचना दें। बचाए गए दोनों भालू बच्चों का शिमला चिड़ियाघर में स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि वे फिलहाल स्थिर हालत में हैं और उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है।
जांच जारी, दीर्घकालिक रणनीति पर मंथन
इस घटना ने अधिकारियों को शिमला जिले में वन्यजीव प्रबंधन नीति पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है। राज्य वन्यजीव बोर्ड इस सप्ताह आपात बैठक बुलाने जा रहा है, जिसमें आवास बहाली और जनजागरूकता कार्यक्रमों जैसे दीर्घकालिक समाधानों पर चर्चा होगी। फिलहाल, अधिकारी दोनों भालू बच्चों की सुरक्षित वसूली और क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
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