नई दिल्ली, अप्रैल 22 — **शिमला, 22 अप्रैल:** हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र को गाँवों तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को नगर निकायों के चुनावों की तिथि घोषित कर दी है। इसी क्रम में राज्य में जल्द ही होने वाले पंचायत चुनावों की तारीखों का एलान भी अप्रैल 28 तक किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों ने बताया कि नवनिर्मित पंचायतों की अंतिम मतदाता सूची 27 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी, जबकि मौजूदा पंचायतों की सूची 24 अप्रैल को जारी होगी। इससे चुनाव कार्यक्रम तय करने का रास्ता साफ होगा।
चुनाव कार्यक्रम की शुरुआत
राज्य निर्वाचन आयुक्त राकेश शर्मा ने शिमला में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि पूरे राज्य में 189 नयी पंचायतों के गठन के बाद निर्वाचन आयोग ने जिला अधिकारियों को मतदाता सूची के संशोधन में तेजी लाने का निर्देश दिया है। शर्मा के अनुसार, इन नयी पंचायतों की मतदाता सूची 27 अप्रैल तक पूरी हो जाएगी, जबकि मौजूदा पंचायतों की सूची 24 अप्रैल को प्रकाशित होगी। उन्होंने कहा कि जब सूचियाँ अंतिम हो जाएँगी, उसके तुरंत बाद पंचायत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा सात दिनों के भीतर हो सकती है, हालांकि अभी इसकी सटीक तारीख तय नहीं हुई है। यह कदम 2025 में हुई परिसीमन प्रक्रिया के बाद आया है, जिसकी वजह से राज्य में 189 नयी पंचायतें बनी हैं। इससे राज्य में ग्रामीण स्थानीय निकायों की संख्या बढ़कर 3,758 हो गई है, जो पहले 3,569 थी।
मतदाता आधार बढ़ा, अब 65 लाख
राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के विस्तार और नयी मतदाता सूचियों के जुड़ने से अब कुल 65 लाख पंजीकृत मतदाता हो गए हैं। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। नयी पंचायतें पूरे राज्य के 12 जिलों में फैली हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या मंडी (34), कांगड़ा (29) और हमीरपुर (22) में हैं। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य शासन को विकेंद्रीकृत करना और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लोगों के करीब लाना है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूचियों की छपाई पूरी कर 24 और 27 अप्रैल की निर्धारित तारीखों तक उन्हें निर्धारित केंद्रों पर प्रदर्शित कराने का निर्देश दिया गया है। शर्मा ने दोहराया कि आयोग ने सभी उपायुक्तों को पारदर्शिता और पहुँच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने कहा कि कोई गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजनीतिक दलों की तैयारियाँ
चुनाव कार्यक्रम के जल्द आने के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क शुरू कर चुके हैं। राज्य भाजपा इकाई के सूत्रों ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सर्वेक्षण करने और मतदाताओं की राय समझने के लिए पूरी तरह से तैयार किया जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी शामिल हैं, ने स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं ताकि चुनाव से पहले समर्थन मजबूत किया जा सके। कांग्रेस पार्टी ग्रामीण हिमाचल में अपनी मजबूत उपस्थिति के कारण पंचायत चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आश्वस्त है। वहीं, आप पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अपना आधार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी प्रवक्ता रश्मि वर्मा ने कहा कि आप स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे जैसे मुद्दों को उठाएगी ताकि ग्रामीण मतदाताओं से जुड़ सके।
प्रशासनिक तैयारियाँ भी तेज
राज्य सरकार ने चुनावों के सुचारू संचालन के लिए पूरी प्रशासनिक तैयारियाँ सुनिश्चित की हैं, जिसमें कानून व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य पुलिस और जिला प्रशासन को राजनीतिक तनाव वाली जगहों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा सकती है। निर्वाचन आयोग ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के अनुसार चुनाव अवधि में शराब के विक्रय एवं वितरण पर नज़र रखने के लिए राज्य उत्पाद शुल्क एवं कर विभाग को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख तिथियाँ
24 अप्रैल: मौजूदा पंचायतों की मतदाता सूची प्रकाशित
27 अप्रैल: नयी पंचायतों की अंतिम मतदाता सूची
28 अप्रैल (अपेक्षित): पंचायत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा
कार्यक्रम घोषणा के 30 दिनों के भीतर: मतदान तिथियाँ
पूरे चुनाव प्रक्रिया के 60 दिनों के भीतर परिणामों की घोषणा
अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम की घोषणा से लेकर परिणाम घोषित होने तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 60 दिन में पूरी हो जाएगी। जुलाई में नयी चुनी गई पंचायतें कार्यभार संभाल लेंगी। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर स्थानीय निकायों के चुनावों की तैयारी चल रही है। राज्य के 65 लाख मतदाताओं की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हुए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना ही मुख्य लक्ष्य है।
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