शिमला, 30 मार्च: हिमाचल प्रदेश एक बार फिर खराब मौसम के दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार और मंगलवार के लिए राज्य में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
यह चेतावनी खास तौर पर शिमला, मंडी और कुल्लू जैसे जिलों के लिए अहम मानी जा रही है, जहां गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर ओले गिरने का अंदेशा है। प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम पहले ही ठंडा और अस्थिर हो चुका है। निचले इलाकों में बारिश हुई है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फिर से बर्फबारी देखने को मिली है।
इस पूरे बदलाव के पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है, जिसने प्रदेश के ऊपर नमी और अस्थिरता बढ़ा दी है। ऐसे सिस्टम में मौसम सिर्फ बादल छाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई जगहों पर दोपहर और शाम के दौरान अचानक तेज हो सकता है — और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में यही हिस्सा सबसे ज्यादा असर डालता है।
सफर, बागवानी और पहाड़ी सड़कों पर असर पड़ सकता है
हिमाचल में इस तरह का मौसम रोजमर्रा की आवाजाही को बहुत जल्दी प्रभावित कर सकता है। बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की वजह से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, दृश्यता घट सकती है और खासकर मिड-हिल व ऊपरी इलाकों में सफर मुश्किल हो सकता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते पर्यटक आवाजाही पर पहले से असर देखा गया है, और प्रशासन ने लोगों को संवेदनशील रूट्स की ओर बिना जरूरत यात्रा से बचने की सलाह दी है।
किसानों और बागवानों के लिए सबसे बड़ी चिंता ओलावृष्टि है। ओलों की छोटी-सी मार भी खड़ी फसलों, सब्जियों और फलदार क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां बागवानी का मौसम संवेदनशील चरण में पहुंच रहा है। यही वजह है कि हिमाचल में इस तरह के मौसम अलर्ट को बहुत गंभीरता से देखा जाता है।
लोगों को सलाह दी गई है कि गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, ऊंची रिज लाइनों और अकेले खड़े पेड़ों से दूर रहें। पहाड़ी राज्यों में मौसम कई बार कुछ ही मिनटों में बिगड़ जाता है, इसलिए दिन में हालात सामान्य दिखने पर भी सतर्क रहना जरूरी है।
31 मार्च के बाद थोड़ी राहत, लेकिन अगला सिस्टम भी लाइन में
फिलहाल यह मौसम गतिविधि 31 मार्च तक सक्रिय रहने की संभावना है, जिसके बाद कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। लेकिन यह राहत बहुत लंबी नहीं रह सकती, क्योंकि पूर्वानुमान पहले ही संकेत दे रहे हैं कि 2 अप्रैल से एक और पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। यानी हिमाचल को बहुत लंबा स्थिर मौसम विंडो मिलने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है।
इसी वजह से राज्य में इन दिनों धूप और अचानक खराब मौसम के बीच लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आम लोगों, पर्यटकों और प्रशासन — सभी के लिए आने वाले कुछ दिन सिर्फ एक बारिश वाले सिस्टम का मामला नहीं, बल्कि लगातार अस्थिर मौसम के दौर की तरह हैं।
फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि लोग जिला स्तर की मौसम चेतावनियों पर नजर रखें, खराब मौसम के पीक घंटों में पहाड़ी सफर से बचें और ऑरेंज अलर्ट को हल्के में न लें।
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