शिमला, 29 मार्च: हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराध अब छिटपुट ऑनलाइन ठगी भर नहीं रह गया है। पिछले तीन वर्षों में राज्य के लोगों से करीब ₹150 करोड़ की डिजिटल ठगी हुई है, जिससे साफ है कि ऑनलाइन फ्रॉड का जाल अब प्रदेश के दूर-दराज इलाकों तक फैल चुका है। शनिवार को विधानसभा में रखे गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान साइबर फ्रॉड के 585 मामले दर्ज किए गए, जिनमें जिला स्तर पर सबसे ज्यादा शिकायतें कांगड़ा से सामने आईं।
यह जानकारी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल के जवाब में दी। सरकार ने बताया कि अब तक इन मामलों में 258 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब ₹10.25 करोड़ की रकम बरामद भी हुई है, लेकिन कुल ठगी की तुलना में यह बरामदगी अभी बहुत कम है।
चिंता की बात यह भी है कि खुद सरकार ने सदन में माना कि कई लोग साइबर ठगी होने के बाद भी शिकायत दर्ज नहीं करवाते। ऐसे में वास्तविक नुकसान सरकारी रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।
मामलों में कांगड़ा आगे, लेकिन सबसे ज्यादा रकम कहीं और उड़ी
जिला पुलिस रिकॉर्ड के हिसाब से डिजिटल फ्रॉड के सबसे ज्यादा 59 मामले कांगड़ा में दर्ज हुए। इसके बाद पुलिस जिला बद्दी में 58, सोलन में 41 और मंडी में 30 मामले सामने आए। किन्नौर में 28, सिरमौर में 25, शिमला में 17, ऊना में 13, नूरपुर में 12, जबकि चंबा और कुल्लू में 10-10 मामले दर्ज हुए। देहरा में आठ, हमीरपुर में सात, लाहौल-स्पीति में चार और बिलासपुर में सिर्फ एक मामला दर्ज किया गया।
लेकिन शिकायतों की संख्या और ठगी की रकम का पैटर्न एक जैसा नहीं है। सबसे ज्यादा रकम साइबर पुलिस स्टेशन शिमला के दायरे में दर्ज हुई, जहां ₹55.62 करोड़ से अधिक की ठगी सामने आई। साइबर पुलिस स्टेशन मंडी में यह आंकड़ा ₹33.64 करोड़ से ज्यादा रहा, जबकि धर्मशाला साइबर पुलिस स्टेशन के तहत करीब ₹25.92 करोड़ की ठगी दर्ज हुई।
यानी साइबर अपराध सिर्फ ज्यादा शिकायतों वाला अपराध नहीं रह गया है, बल्कि कई मामलों में कम संख्या के बावजूद बहुत बड़ी रकम उड़ा ली जा रही है। यही वजह है कि अब यह कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा का भी बड़ा सवाल बन चुका है।
पुलिस ने बढ़ाई तैयारी, बैंकों की भूमिका भी सवालों में
बढ़ते साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्य के सभी 146 पुलिस थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। सरकार ने विधानसभा में बताया कि आठ अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 29 अन्य अधिकारियों का प्रशिक्षण अभी जारी है।
इस पूरी तस्वीर में सिर्फ साइबर गिरोह ही नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की कुछ कमजोरियां भी सामने आई हैं। सरकार ने बताया कि कुछ मामलों में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत या लापरवाही भी सामने आई, जिसके चलते चार बैंक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि हिमाचल में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ठगी अब सड़क, बाजार या दस्तावेजों तक सीमित नहीं है; अब यह मोबाइल कॉल, फर्जी लिंक, निवेश के झांसे, KYC अपडेट के बहाने और बैंक खातों तक पहुंच के जरिए हो रही है। ऐसे में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ डिजिटल जागरूकता, बैंकिंग सतर्कता और समय पर शिकायत दर्ज कराना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
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