मुंबई, 24 मार्च: भारतीय रुपया मंगलवार को शुरुआती कारोबार में 35 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.88 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया करीब 93.66 पर खुला और इसके बाद लगातार कमजोरी दिखाता रहा, जो वैश्विक दबाव और घरेलू बाजार की सुस्ती को दर्शाता है।
मजबूत डॉलर और वैश्विक संकेतों का असर
हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। भारत जैसे देशों में इसका असर सीधे रुपये पर दिखता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी एक बड़ा कारण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है।
वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुख भी सतर्क बना हुआ है, जिससे पूंजी का बहिर्वाह जारी है।
घरेलू बाजार की स्थिति भी जिम्मेदार
घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है।
जब विदेशी निवेश घटता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और इसका सीधा असर रुपये की कीमत पर पड़ता है।
हाल के सत्रों में रुपया लगातार नए निचले स्तर छू रहा है, जिससे साफ है कि अभी दबाव बना हुआ है।
Discover more from Enoxx News (Hindi)
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
