शिमला, 24 मार्च: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की तैयारी है, क्योंकि विधानसभा ने सरकार को ईंधन पर ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की अनुमति दे दी है।
यह फैसला वैट कानून में संशोधन के जरिए लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे मिलने वाला अतिरिक्त राजस्व अनाथों और विधवाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं में लगाया जाएगा।
हालांकि अधिकतम सीमा ₹5 तय की गई है, लेकिन संकेत हैं कि बढ़ोतरी एक साथ लागू करने के बजाय चरणों में की जा सकती है।
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विपक्ष का हमला, विधानसभा में वॉकआउट
इस फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
विधानसभा के अंदर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह कदम सीधे तौर पर आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर असर डालेगा।
विरोध इतना बढ़ा कि भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और इस फैसले को “जनविरोधी” बताया। साथ ही यह भी कहा गया कि अगर पूरा सेस लागू हुआ तो पेट्रोल की कीमत ₹100 प्रति लीटर के करीब पहुंच सकती है।
पहाड़ी राज्य में असर ज्यादा क्यों पड़ता है
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर जल्दी और व्यापक रूप से दिखता है। यहां अधिकांश सामान दूर-दराज इलाकों तक पहुंचाया जाता है, जिससे परिवहन लागत पहले ही ज्यादा रहती है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल महंगा होते ही भाड़ा बढ़ता है, और कुछ ही दिनों में इसका असर बाजार में दिखने लगता है।
इसका असर सब्जियों, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए भी लागत बढ़ना तय माना जा रहा है।
फिलहाल राज्य में पेट्रोल करीब ₹94 और डीजल ₹86 प्रति लीटर के आसपास है। नए सेस के लागू होने के बाद इन कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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