शिमला, 19 मार्च: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ₹40,461 करोड़ की अनुपूरक मांगें पेश कीं।
यह अतिरिक्त बजट राज्य के बढ़ते खर्च और वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए लाया गया है।
वेतन, पेंशन और कर्ज पर बड़ा खर्च
राज्य सरकार के कुल राजस्व का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज भुगतान पर खर्च होता है।
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य की आय का लगभग 60-65 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं मदों में खर्च हो जाता है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
इस अतिरिक्त बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए भी प्रावधान किया गया है।
सरकार का फोकस सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने और योजनाओं को जारी रखने पर है।
बढ़ता कर्ज बना चुनौती
हिमाचल प्रदेश का कुल कर्ज ₹80,000 करोड़ से अधिक बताया जा रहा है, जो राज्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सीमित संसाधन और केंद्र पर निर्भरता राज्य की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करते हैं।
विधानसभा में राजनीतिक बहस
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए।
सरकार ने कहा कि यह कदम जरूरी है ताकि कर्मचारियों को समय पर भुगतान और विकास कार्य जारी रह सकें।
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