हमीरपुर, 12 मार्च — हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर शहर के आसपास के क्षेत्रों में पीलिया के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी स्कूल के 14 विद्यार्थियों सहित कई ग्रामीण इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में जांच और स्क्रीनिंग अभियान शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक करीब 39 लोगों में पीलिया के लक्षण पाए गए हैं, जिनमें से कई मरीजों का उपचार चल रहा है। कुछ मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि कई लोगों का इलाज घर पर ही किया जा रहा है।
इस प्रकोप से सबसे अधिक प्रभावित राजकीय उच्च विद्यालय स्वाहल के छात्र हैं। स्कूल के 14 विद्यार्थियों में पीलिया की पुष्टि होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। विद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रभावित छात्रों का इलाज किया जा रहा है और उनकी निगरानी जारी है।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
पीलिया के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य और जल शक्ति विभाग की टीमें गांवों में सक्रिय हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल स्रोतों और जल आपूर्ति बिंदुओं से पानी के कई नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए हैं, ताकि बीमारी के कारण का पता लगाया जा सके।
एहतियात के तौर पर लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की गोलियां भी वितरित की जा रही हैं ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।
जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि जमली पेयजल योजना से आने वाला पानी कहीं दूषित तो नहीं है। इसी योजना के जरिए स्वाहल, भाटी और मझोट सहित कई गांवों में पानी की आपूर्ति होती है।
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कई गांवों में मिले मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार स्वाहल, बड़ू, बली, मझोट, काथल, दोसड़का, मोहीं और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र से पीलिया के मामले सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि बीमारी का फैलाव कई गांवों तक पहुंच चुका है।
अब तक सामने आए मरीजों में से लगभग 25 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि कुछ मरीजों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है। अन्य मरीजों का इलाज घर पर डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है।
सरकार ने मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों, खासकर स्कूली बच्चों को उचित इलाज और दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं।
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि पेयजल स्रोत के आसपास गंदे पानी के जमा होने या औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण पानी दूषित हो सकता है। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि पानी के नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आने वाले दिनों में गांवों में जागरूकता अभियान और स्वास्थ्य जांच जारी रहेगी ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।
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