चंडीगढ़, 11 मार्च — Punjab Legislative Assembly ने भारत और United States के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। विधानसभा में यह चिंता व्यक्त की गई कि इस समझौते का असर राज्य के किसानों और स्थानीय उद्योगों पर पड़ सकता है।
विधानसभा सत्र के दौरान सदस्यों ने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
विधायकों का कहना था कि यदि कृषि उत्पादों के आयात को बढ़ावा मिला तो इससे स्थानीय किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव
सदस्यों ने चर्चा के दौरान कहा कि पंजाब के किसान पहले से ही बढ़ती लागत और बाजार में अनिश्चितता जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर बातचीत करते समय किसानों और स्थानीय उद्योगों के हितों का ध्यान रखा जाए।
राज्य सरकार का रुख
चर्चा के दौरान नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ घरेलू उत्पादन और रोजगार की सुरक्षा भी जरूरी है।
राज्य सरकार ने कहा कि ऐसे किसी भी बड़े व्यापार समझौते से पहले राज्यों और किसान संगठनों से व्यापक परामर्श होना चाहिए।
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भारत और अन्य देशों के बीच व्यापार समझौतों को लेकर अक्सर नीति स्तर पर बहस होती रही है। समर्थकों का मानना है कि इससे निर्यात बढ़ सकता है और नए बाजारों तक पहुंच मिलती है।
वहीं आलोचकों का कहना है कि कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
आगे की प्रक्रिया
पंजाब विधानसभा द्वारा पारित यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा ताकि व्यापार नीति पर चल रही चर्चाओं के दौरान राज्य की चिंताओं पर विचार किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा वैश्विक व्यापार और घरेलू आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाता है।
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