बेरूत, 10 मार्च — Israel और लेबनान के सशस्त्र संगठन Hezbollah के बीच संघर्ष पिछले चार दशकों से मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा स्थिति को प्रभावित करता रहा है।
यह टकराव 1980 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ और समय-समय पर बड़े युद्धों, सीमा झड़पों और सैन्य तनाव के रूप में सामने आता रहा है।
1982: लेबनान युद्ध और हिज़्बुल्लाह का उदय
इस संघर्ष की शुरुआत 1982 के लेबनान युद्ध के दौरान हुई जब इजराइल ने फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) को दक्षिणी लेबनान से हटाने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया।
इसी दौर में हिज़्बुल्लाह का गठन हुआ। यह संगठन मुख्य रूप से लेबनान के शिया समुदाय से जुड़ा हुआ है और इसे ईरान का समर्थन प्राप्त रहा है।
हिज़्बुल्लाह ने खुद को इजराइली सैन्य उपस्थिति के खिलाफ प्रतिरोध आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया।

1990 का दशक: सीमा पर गुरिल्ला संघर्ष
1990 के दशक में दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना और हिज़्बुल्लाह के बीच लगातार झड़पें होती रहीं।
इस दौरान सड़क किनारे बम विस्फोट, रॉकेट हमले और सैन्य टकराव आम रहे। इजराइल ने इसके जवाब में हवाई हमले और तोपखाने से कार्रवाई की।
इस दौर में हिज़्बुल्लाह क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली गैर-राज्य सैन्य ताकतों में शामिल हो गया।
2000: दक्षिणी लेबनान से इजराइली वापसी
मई 2000 में इजराइल ने लगभग दो दशक बाद दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुला ली।
हिज़्बुल्लाह ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, लेकिन सीमा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। विशेष रूप से शेबा फार्म्स क्षेत्र को लेकर विवाद बना रहा।
2006: दूसरा लेबनान युद्ध
जुलाई 2006 में हिज़्बुल्लाह द्वारा दो इजराइली सैनिकों को पकड़ने की घटना के बाद संघर्ष तेज हो गया।
इसके जवाब में इजराइल ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया, जो करीब 34 दिन तक चला।
इस युद्ध में लेबनान में भारी तबाही हुई और लाखों लोग विस्थापित हुए। अंततः संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू हुआ।
2010 का दशक: क्षेत्रीय तनाव
2010 के दशक में दोनों पक्षों के बीच बड़े युद्ध से बचाव रहा, लेकिन तनाव बना रहा।
सीरिया के गृहयुद्ध में हिज़्बुल्लाह की भूमिका बढ़ने से उसकी सैन्य ताकत और क्षेत्रीय प्रभाव भी बढ़ा। इजराइल ने कई बार ऐसे हथियारों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए जो कथित तौर पर हिज़्बुल्लाह तक पहुंचाए जा रहे थे।
2023–2026: फिर बढ़ा सीमा तनाव
हाल के वर्षों में इजराइल और लेबनान सीमा पर फिर से तनाव बढ़ा है।
रॉकेट हमलों, ड्रोन हमलों और तोपखाने की कार्रवाई के कारण कई बार स्थिति गंभीर हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और संघर्ष को व्यापक युद्ध में बदलने से रोकने की अपील की है।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच टकराव मध्य पूर्व की सबसे संवेदनशील सुरक्षा चुनौतियों में से एक है।
हिज़्बुल्लाह के पास बड़ी संख्या में रॉकेट और मिसाइलें हैं, जबकि इजराइल इसे अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है।
कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन सीमा पर तनाव की स्थिति अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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