शिमला, 8 मार्च — हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के लोकमित्र केंद्रों में सेवाओं के लिए मनमाने शुल्क की शिकायतों को रोकने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने वाले संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और गंभीर मामलों में लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।
डिपार्टमेंट ऑफ डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य डिजिटल सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों को अनावश्यक शुल्क से बचाना है। राज्य भर में कार्यरत हजारों लोकमित्र केंद्रों को इन नियमों का पालन करना होगा।
राज्य में वर्तमान समय में लगभग 7900 लोकमित्र केंद्र सक्रिय हैं, जो नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें प्रमाणपत्र आवेदन, दस्तावेज़ संबंधित सेवाएं और आधार से जुड़े कार्य शामिल हैं।
तय शुल्क से अधिक वसूली पर कार्रवाई
नई एसओपी के अनुसार लोकमित्र केंद्र संचालक केवल सरकार द्वारा निर्धारित सेवा शुल्क ही ले सकेंगे। यदि कोई केंद्र निर्धारित दर से अधिक शुल्क वसूलता पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहली बार उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित केंद्र की सीएससी आईडी एक महीने के लिए ब्लॉक की जा सकती है और चेतावनी जारी की जाएगी। यदि बार-बार नियमों का उल्लंघन होता है तो निलंबन की अवधि बढ़ाई जा सकती है और अंततः लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि यह कदम नागरिकों को पारदर्शी और सस्ती डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।
सेवा शुल्क सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य
सरकार ने सभी लोकमित्र केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने परिसर में सेवाओं की आधिकारिक दर सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें। इससे नागरिकों को भुगतान से पहले यह जानकारी मिल सकेगी कि किसी सेवा के लिए निर्धारित शुल्क कितना है।
डिपार्टमेंट ऑफ डिजिटल टेक्नोलॉजीज एंड गवर्नेंस के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सेवा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने कहा, “नागरिक किसी भी सेवा के लिए भुगतान करने से पहले प्रदर्शित दर सूची की जांच जरूर करें। इससे अनावश्यक शुल्क वसूली को रोका जा सकेगा।”
नियमित निरीक्षण की व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत लोकमित्र केंद्रों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। जिला स्तर पर ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजरों को प्रत्येक तिमाही में कम से कम 15 केंद्रों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन निरीक्षणों के दौरान अधिकारी केंद्रों पर आने वाले लोगों से बातचीत कर यह भी सुनिश्चित करेंगे कि उनसे निर्धारित शुल्क ही लिया जा रहा है।
यदि निरीक्षण में कोई अनियमितता सामने आती है तो रिपोर्ट राज्य के संबंधित विभाग को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आधार सेवाओं के लिए भी नियम
एसओपी में आधार से संबंधित सेवाओं के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आधार नामांकन और अपडेट से जुड़ी गतिविधियां केवल अधिकृत सरकारी परिसरों से ही संचालित की जा सकेंगी।
यदि कोई ऑपरेटर स्वीकृत स्थान से बाहर आधार सेवाएं संचालित करता या फर्जी नामांकन में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल निलंबन सहित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
नागरिक कैसे दर्ज कर सकते हैं शिकायत
सरकार ने नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। यदि किसी व्यक्ति से लोकमित्र केंद्र में अधिक शुल्क वसूला जाता है या सेवा में अनियमितता होती है, तो वह शिकायत दर्ज कर सकता है।
इसके लिए मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100, आधिकारिक शिकायत पोर्टल, ई-मेल या जिला प्रशासन के माध्यम से शिकायत की जा सकती है।
शिकायत मिलने के बाद जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगी और आवश्यक होने पर आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेजेगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
लोकमित्र केंद्र हिमाचल प्रदेश में ई-गवर्नेंस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ये केंद्र नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराते हैं।
सरकार का मानना है कि नई एसओपी के माध्यम से सेवा शुल्क में पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों का भरोसा मजबूत होगा।
समापन
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई एसओपी तुरंत प्रभाव से लागू होगी। नियमित निरीक्षण और शिकायत तंत्र के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से मिलने वाली डिजिटल सेवाएं पारदर्शी और भरोसेमंद बनी रहें।
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