वॉशिंगटन, 7 मार्च — अमेरिका और ईरान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं और यह तनाव मध्य पूर्व की राजनीति तथा सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालता रहा है। दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे राजनीतिक मतभेद, सैन्य टकराव और कूटनीतिक विवाद इस क्षेत्र के कई संघर्षों से जुड़े रहे हैं।
हाल के घटनाक्रमों के बाद एक बार फिर इस रिश्ते के इतिहास और इसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध केवल द्विपक्षीय मुद्दा नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन से जुड़ा हुआ है।
अमेरिका–ईरान तनाव की शुरुआत
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की जड़ें 1979 की ईरानी क्रांति तक जाती हैं। इस क्रांति के बाद शाह के शासन का अंत हुआ, जिन्हें अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता था।
क्रांति के बाद तेहरान में अमेरिकी दूतावास संकट ने दोनों देशों के संबंधों को और खराब कर दिया। उस घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी रही।
इसके बाद से कूटनीतिक संबंध सीमित हो गए और दोनों देशों ने कई मुद्दों पर एक-दूसरे पर आरोप लगाए।
क्षेत्रीय राजनीति और प्रतिस्पर्धा
मध्य पूर्व में कई संघर्षों के दौरान अमेरिका और ईरान अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते रहे हैं। ईरान ने लेबनान, इराक और सीरिया में विभिन्न राजनीतिक और सशस्त्र समूहों के साथ संबंध विकसित किए हैं।
वहीं अमेरिका ने इज़राइल और कई खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखी है।
इन अलग-अलग गठबंधनों के कारण क्षेत्रीय राजनीति में प्रतिस्पर्धा और तनाव बढ़ता रहा है।
परमाणु कार्यक्रम विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का एक महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। पश्चिमी देशों ने इस कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए है।
2015 में ईरान और कई वैश्विक शक्तियों के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों को सीमित करना था।
हालांकि बाद के वर्षों में इस समझौते को लेकर विवाद बढ़े और दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया।
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ता है। क्षेत्रीय संघर्ष, सैन्य गतिविधियां और आर्थिक प्रतिबंध कई देशों की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
मध्य पूर्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है, इसलिए यहां की अस्थिरता का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
अमेरिका और ईरान के बीच संबंध केवल दो देशों तक सीमित नहीं हैं। इनके बीच होने वाली किसी भी घटना का असर वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय अक्सर कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से तनाव कम करने पर जोर देता है।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी कूटनीतिक वार्ता और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता इस संबंध को प्रभावित करती रहेंगी।
दोनों देशों के बीच मतभेदों को कम करने के लिए दीर्घकालिक बातचीत और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता बताई जाती है।
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