भारत के खूबसूरत दक्षिणी राज्य केरल की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को अब संविधान में भी उसका सही और मूल नाम मिलने जा रहा है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली के ‘सेवा तीर्थ’ (नया पीएमओ) में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक बेहद अहम फैसला लिया गया। सरकार ने केरल का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ (Keralam) करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी।
इनोक्स न्यूज़ (Enoxx News) की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला केवल एक नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों मलयाली भाषियों की भावनाओं का सम्मान है। दरअसल, स्थानीय मलयालम भाषा में इस राज्य को हमेशा से ‘केरलम’ ही कहा जाता रहा है। 1 नवंबर 1956 को जब भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ था (जिसे आज केरल पिरवी के रूप में मनाया जाता है), तब से ही यह मांग उठ रही थी कि राज्य का संवैधानिक नाम स्थानीय भाषा के अनुरूप होना चाहिए। लेकिन उस वक्त संविधान की पहली अनुसूची में इसे ‘केरल’ के रूप में ही दर्ज किया गया था।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस दिशा में गंभीर प्रयास किए। 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलने का आग्रह किया था। इससे पहले 2023 में भी एक प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुझाए गए कुछ तकनीकी बदलावों के कारण इसे दोबारा पारित करना पड़ा था।
अब आगे क्या होगी प्रक्रिया? संवैधानिक नियमों के तहत, कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब भारत के राष्ट्रपति ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत केरल विधानसभा के पास उनके आधिकारिक विचार जानने के लिए भेजेंगे। राज्य विधानसभा की औपचारिक राय मिलने के बाद, केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पेश करेगी। संसद से पास होने के बाद संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का नाम हमेशा के लिए ‘केरलम’ कर दिया जाएगा।
इस फैसले की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हैं। केरल में इस साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में इस फैसले को एक बड़े राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर राज्य के सभी प्रमुख दल एकमत हैं। केरल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस बदलाव का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे राज्य की परंपराओं और संस्कृति को सहेजने वाला एक जरूरी कदम बताया है।
इस गंभीर और ऐतिहासिक फैसले के बीच तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक दिलचस्प और मजाकिया सवाल भी उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पूछा कि नाम बदलने के बाद अंग्रेजी में राज्य के निवासियों को क्या कहा जाएगा? थरूर ने चुटकी लेते हुए कहा कि क्या अब ‘केरलाइट’ (Keralite) की जगह ‘केरलमाइट’ (Keralamite) कहा जाएगा, जो सुनने में किसी माइक्रोब (कीटाणु) जैसा लगता है, या फिर ‘केरलमियन’ (Keralamian), जो किसी दुर्लभ खनिज (Mineral) का नाम प्रतीत होता है।
बहरहाल, ‘केरल’ से ‘केरलम’ तक का यह सफर राज्य की भाषाई अस्मिता की एक बड़ी जीत है, जो जल्द ही देश के नक्शे पर नए रूप में अंकित होगी।
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