लखनऊ में हाल ही में हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक बेटे द्वारा अपने ही पिता की गोली मारकर हत्या करने, फिर आरी से उसके टुकड़े-टुकड़े करके एक नीले ड्रम में छिपाने की यह खौफनाक वारदात किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसी लगती है। शुरुआत में यह बात सामने आ रही थी कि आरोपी बेटे अक्षत ने नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी के अत्यधिक दबाव से तंग आकर इस खौफनाक कदम को उठाया। लेकिन इनोक्स न्यूज़ (Enoxx News) की विस्तृत पड़ताल में इस हत्याकांड के पीछे की एक बेहद चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है।
मृतक मानवेंद्र सिंह शहर के एक जाने-माने और रसूखदार व्यवसायी थे, जिनका पैथोलॉजी लैब और शराब की दुकानों का करोड़ों का कारोबार था। वे चाहते थे कि उनका बेटा अक्षत पढ़-लिखकर एक काबिल डॉक्टर बने और समाज में अपना एक अलग मुकाम हासिल करे। लेकिन अक्षत की सोच अपने पिता से बिल्कुल उलट थी। वह मेडिकल की पढ़ाई में सालों खपाने के बजाय, पिता के पहले से जमे-जमाए और मुनाफे वाले बिजनेस पर तुरंत कब्जा करना चाहता था। पिता का मानना था कि पहले पेशेवर डिग्री हासिल की जाए, जबकि बेटा सीधे बॉस की कुर्सी पर बैठना चाहता था।
करीब चार महीने पहले घर में हुई एक चोरी ने पिता-पुत्र के इस तनावपूर्ण रिश्ते में आग में घी का काम किया। घर से लाखों रुपये के कीमती जेवर गायब हो गए थे। पहले शक नौकरों पर गया और पुलिस में शिकायत भी की गई, लेकिन बाद में पारिवारिक स्तर पर हुई छानबीन में शक की सुई सीधे अक्षत की तरफ घूमने लगी। बदनामी के डर से मानवेंद्र सिंह ने शिकायत तो वापस ले ली, लेकिन अपने ही बेटे से उनका भरोसा हमेशा के लिए उठ गया। इसके बाद से उन्होंने अक्षत की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी, जो बेटे को और भी ज्यादा नागवार गुजरने लगी।
बीती 20 फरवरी की सुबह, पढ़ाई और बिजनेस को लेकर पिता-पुत्र के बीच फिर से तीखी बहस हुई। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर अक्षत ने अपनी पिता की लाइसेंसी राइफल उठाई और उनके सिर में गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर अक्षत की छोटी बहन कृति दौड़कर कमरे में पहुंची, तो वहां का भयानक मंजर देखकर उसके होश उड़ गए। पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने अपनी बहन को जान से मारने की धमकी दी और उसे कई दिनों तक दहशत में खामोश रखा।
हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाना अक्षत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। लाश भारी होने के कारण वह उसे अकेले कार तक नहीं ले जा सका। ऐसे में उसने बाजार से एक आरी खरीदी और बड़ी ही बेरहमी से अपने ही पिता के हाथ-पैर काट डाले। इन कटे हुए अंगों को उसने कार में रखकर शहर के सद्रौना इलाके में फेंक दिया। शव के बाकी हिस्से (धड़) को ठिकाने लगाने के लिए उसने एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा और लाश को उसी में ठूंस कर रख दिया। सुबूत मिटाने के लिए घर में एसिड का भी इस्तेमाल किया गया।
खुद को बचाने के लिए अक्षत ने 21 फरवरी को पुलिस में पिता की गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई और कहानी रची कि वे दिल्ली गए हैं। लेकिन फॉरेंसिक टीम को घर और कार की डिक्की से खून के धब्बे और सफाई के सुबूत मिल गए। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो अक्षत के बदलते बयानों ने उसका सारा राज खोल दिया और अंततः उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
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