नई दिल्ली | ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान (A.R. Rahman) और ध्रुपद गायन परंपरा के मशहूर डागर घराने के बीच चल रहे कॉपीराइट विवाद में शुक्रवार को एक अहम फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बाद, रहमान ने मणिरत्नम की फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन 2’ (PS-2) के लोकप्रिय गीत ‘वीरा राजा वीरा’ (Veera Raja Veera) के क्रेडिट में जूनियर डागर बंधुओं को श्रेय (Credit) देने पर सहमति जता दी है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच के समक्ष रहमान के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह जानकारी दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगले 5 हफ्तों के भीतर सभी ओटीटी (OTT) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गाने के क्रेडिट में बदलाव किया जाए।
नए बदलाव के बाद स्क्रीन पर लिखा आएगा: “यह रचना डागरवानी परंपरा के ध्रुपद से प्रेरित है, जिसे सबसे पहले ‘शिव स्तुति’ के रूप में स्वर्गीय उस्ताद नासिर फैयाजुद्दीन डागर और उस्ताद नासिर जहीरुद्दीन डागर (जिन्हें जूनियर डागर बंधुओं के रूप में जाना जाता है) द्वारा रिकॉर्ड किया गया था।”
क्या है पूरा विवाद? यह पूरा विवाद साल 2023 में फिल्म की रिलीज के बाद शुरू हुआ था। जूनियर डागर बंधुओं के उत्तराधिकारी और पद्मश्री से सम्मानित उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने दिल्ली हाई कोर्ट में कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि ‘वीरा राजा वीरा’ गाने की धुन, ताल और संगीत का मूल ढांचा उनके पिता और चाचा द्वारा 1970 के दशक में रची गई ‘शिव स्तुति’ (Shiva Stuti) की हूबहू नकल है।
दूसरी तरफ, एआर रहमान और फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी ‘मद्रास टॉकीज’ की दलील थी कि ‘शिव स्तुति’ पब्लिक डोमेन (Public Domain) का हिस्सा है और यह गाना पूरी तरह से उनकी एक नई रचनात्मक पेशकश है।
कानूनी लड़ाई का सफर इस मामले में अप्रैल 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने डागर परिवार के पक्ष में अंतरिम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने रहमान को क्रेडिट सुधारने के साथ-साथ ₹2 करोड़ कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में सितंबर 2025 में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस फैसले को पलट दिया, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी पिछली सुनवाई (13 फरवरी) के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझाते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत में घराने के योगदान को याद किया था। कोर्ट ने रहमान के वकीलों से कहा था कि, “वे (डागर परिवार) शास्त्रीय संगीत के पारंपरिक उपासक हैं। वे आपके साथ व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं। वे केवल सम्मान और पहचान चाहते हैं।”
इस टिप्पणी के बाद ही रहमान ने क्रेडिट देने पर अपनी मुहर लगाई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह केवल एक अंतरिम (अस्थायी) व्यवस्था है। गाने के कॉपीराइट को लेकर मुख्य मुकदमा दिल्ली हाई कोर्ट में बिना किसी दबाव के चलता रहेगा। इसके अलावा, रहमान द्वारा जमा किए गए ₹2 करोड़ भी अंतिम फैसला आने तक हाई कोर्ट के पास ही सुरक्षित रहेंगे।
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