क्या भारत के ‘IT बूम’ का अंत करीब है? यह सवाल डराने वाला है, लेकिन चीन के नए AI मॉडल DeepSeek V4 की खबर सुनने के बाद इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत की पूरी IT इंडस्ट्री एक ही फॉर्मूले पर चलती है—अमेरिका और यूरोप का काम सस्ते में करना। लेकिन अब मुकाबला इंसान से नहीं, मशीन से है। और यह मशीन (AI) इंसान से भी सस्ती है।
‘सस्ता कोडर’ या ‘बेरोजगारी का तूफान’? DeepSeek V4 के बारे में कहा जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे बेहतरीन ‘सॉफ्टवेयर इंजीनियर’ है। एक फ्रेशर (नया इंजीनियर) को कोड लिखने, उसे चेक करने और गलती सुधारने में घंटों लगते हैं। यह AI वही काम सेकंडों में कर देता है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर यह मॉडल सफल रहा, तो कंपनियां ‘मास हायरिंग’ (Mass Hiring) बंद कर सकती हैं। “जब एक AI सॉफ्टवेयर 100 जूनियर इंजीनियरों का काम अकेले कर सकता है, तो कोई टीसीएस या इंफोसिस को प्रोजेक्ट क्यों देगा?” एक वरिष्ठ टेक विश्लेषक ने चेतावनी दी।
इंजीनियरिंग की डिग्री: रद्दी का टुकड़ा? हर साल भारत में लाखों माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई बच्चों को इंजीनियर बनाने में लगाते हैं। लेकिन 2026 में डिग्री से ज्यादा ‘स्किल’ (हुनर) की जरूरत है। जो छात्र सिर्फ रट्टा मारकर पास हुए हैं या जिन्हें सिर्फ बेसिक कोडिंग आती है, उनकी नौकरी सबसे पहले खतरे में है। अब सिर्फ वही टिकेगा जो AI को चलाना जानता हो, न कि वो जो AI से मुकाबला करने की कोशिश करे।
खतरे की घंटी यह सिर्फ एक सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं है, यह भारतीय मध्य वर्ग (Middle Class) के सपनों पर हमला है। अगर हमारी IT कंपनियों ने खुद को नहीं बदला, तो ‘सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया’ (बेंगलुरु) में सन्नाटा पसर सकता है।
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