भारत और फ्रांस की दोस्ती अब सिर्फ ‘हथियारों’ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अब यह ‘दिमाग’ की लड़ाई में भी साथ-साथ चलेंगे। अगले हफ्ते फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी चौथी भारत यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरान वे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिलकर 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ (India-France Year of Innovation) घोषित करेंगे।
110 फ्रांसीसी कंपनियां कतार में इस बार मैक्रों अकेले नहीं आ रहे। उनके साथ 110 फ्रांसीसी कंपनियों के मालिक और सीईओ भी भारत पहुंच रहे हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा फ्रांसीसी व्यापारिक डेलिगेशन है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष विज्ञान, साइबर सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी की बड़ी-बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इनका मकसद भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में अपने ऑफिस और रिसर्च सेंटर खोलना है।
मुंबई से होगी शुरुआत इस ऐतिहासिक साल की शुरुआत मुंबई से होगी, जहाँ दोनों नेता मिलकर इस मुहीम का उद्घाटन करेंगे। इसका सीधा फायदा भारत के युवाओं को होगा।
- नौकरियां: नई फ्रांसीसी कंपनियों के आने से भारतीय इंजीनियरों के लिए हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी।
- स्टार्टअप्स: भारत के छोटे स्टार्टअप्स को फ्रांस में जाकर काम करने और वहां से फंडिंग उठाने का मौका मिलेगा।
AI में फ्रांस का बड़ा दांव नई दिल्ली में होने वाले ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में फ्रांस का सबसे बड़ा ‘पवेलियन’ (स्टॉल) होगा। फ्रांस चाहता है कि वो अमेरिका और चीन को छोड़कर भारत के साथ मिलकर अपना अलग और सुरक्षित AI सिस्टम बनाए। इसे ‘साधरण AI’ नहीं, बल्कि ‘सॉवरेन AI’ (Sovereign AI) कहा जा रहा है, यानी ऐसा तकनीक जिस पर किसी और देश का कब्जा न हो।
राफेल और स्कॉर्पीन पनडुब्बी के बाद, यह ‘इनोवेशन ईयर’ भारत-फ्रांस की दोस्ती को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। पीएम मोदी का विजन साफ है—भारत अब तकनीक खरीदेगा नहीं, बल्कि दुनिया के साथ मिलकर उसे बनाएगा।
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