इंटरनेट की दुनिया में फैल रहे झूठ और डीपफेक (Deepfake) वीडियो पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने आईटी नियमों में बड़े बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि अब सोशल मीडिया पर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बना कोई भी कंटेंट बिना पहचान के नहीं चलेगा। 10 फरवरी को जारी अधिसूचना के मुताबिक, नए नियम 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे।
क्या बदलेगा आपके लिए? अब जब भी आप फेसबुक, इंस्टाग्राम, या यूट्यूब पर कोई वीडियो देखेंगे जो AI की मदद से बनाया गया है, तो उस पर एक साफ ‘लेबल’ (Label) लगा होगा। यह लेबल बताएगा कि जो आप देख रहे हैं वह असली नहीं, बल्कि कंप्यूटर से तैयार किया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी तकनीक लगाएं जिससे AI कंटेंट की पहचान तुरंत हो सके।
कंपनियों पर गिरा गाज सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे मेटा, गूगल, एक्स) की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।
- 3 घंटे में हटाना होगा कंटेंट: अगर किसी डीपफेक या आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत मिलती है, तो कंपनियों को उसे अब 36 घंटे नहीं, बल्कि सिर्फ 3 घंटे के अंदर हटाना होगा।
- शिकायत का निपटारा 7 दिन में: यूजर्स की शिकायतों का जवाब देने के लिए पहले 15 दिन का समय मिलता था, जिसे घटाकर अब 7 दिन कर दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका मकसद बच्चों के खिलाफ अपराध, किसी की निजी तस्वीरों से छेड़छाड़ और झूठी खबरों को रोकना है। अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नियमों को नहीं मानता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbor) खत्म कर दी जाएगी।
कुल मिलाकर संदेश साफ है— तकनीक का इस्तेमाल कीजिए, लेकिन धोखा देने के लिए नहीं। सरकार की यह सख्ती डिजिटल दुनिया को आम लोगों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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