टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के मैच पर मंडरा रहे खतरे के बादल आखिरकार छंट गए हैं। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार की अपनी जिद छोड़ दी है और इसके लिए बीसीसीआई (BCCI) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के चेयरमैन जय शाह की कूटनीति को श्रेय दिया है। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने साफ कहा कि जय शाह और आईसीसी के अधिकारियों ने इस उलझे हुए मसले का “बेहतरीन समाधान” निकाला है।
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए राजीव शुक्ला ने कहा, “बीसीसीआई की ओर से मैं आईसीसी चेयरमैन जय शाह और उनके सहयोगियों का शुक्रिया अदा करता हूं। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के साथ बातचीत कर खेल के हित में फैसला लिया है। क्रिकेट का चलना जरूरी है और अब यह वर्ल्ड कप एक बड़ी सफलता साबित होगा।”
दरअसल, पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ एकजुटता दिखाते हुए भारत के खिलाफ मैच न खेलने की धमकी दी थी। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में खेलने से मना कर दिया था, जिसके बाद आईसीसी ने उसे टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया था। इस तनातनी को खत्म करने के लिए आईसीसी ने एक बड़ा कदम उठाया— उन्होंने बांग्लादेश पर कोई जुर्माना न लगाने का फैसला किया। बदले में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख अमीनुल इस्लाम ने पाकिस्तान से अपील की कि वे खेल के बड़े हित के लिए भारत के खिलाफ मैच खेलें।
यही नहीं, इस मामले में सियासी स्तर पर भी बड़ी हलचल हुई। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फोन कर मैच खेलने का आग्रह किया। पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी ने जब प्रधानमंत्री को आईसीसी के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा दिया, तब जाकर पाकिस्तान सरकार ने अपना रुख बदला।
खेल के जानकारों का मानना है कि जय शाह के नेतृत्व में आईसीसी ने जिस तरह से दबाव और बातचीत का संतुलन बनाया, उसी का नतीजा है कि पाकिस्तान को बिना किसी बड़ी मांग के पूरा होने के बावजूद वापस आना पड़ा। अब 15 फरवरी को कोलंबो के बजाय दिल्ली में होने वाले इस महामुकाबले के लिए फैंस का उत्साह चरम पर है। यह जीत केवल क्रिकेट की नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक सूझबूझ की भी है जिसने वर्ल्ड कप को फीका होने से बचा लिया।
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