इजरायल के भीतर रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले कुछ दिनों से तेल अवीव और यरूशलेम की सड़कों पर जो जनसैलाब दिख रहा है, वह किसी सीमा विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने ही मोहल्लों में फैलते जा रहे “अपराध के जहर” के खिलाफ है। इस बड़े आंदोलन की शुरुआत साखनीन शहर के एक छोटे से दुकानदार अली ज़बीदत के एक फैसले से हुई।
अली को लंबे समय से अपराधी गैंग धमकियां दे रहे थे और उनसे ‘प्रोटेक्शन मनी’ (हफ्ता) मांग रहे थे। जब अली ने पैसे देने से इनकार किया, तो उनके शोरूम पर गोलियां बरसाई गईं। चार बार हमले होने के बाद, अली ने डरने के बजाय अपनी सभी दुकानें बंद कर दीं और कहा कि जब तक सरकार इन अपराधियों को नहीं रोकती, वे काम नहीं करेंगे। उनकी इस एक ‘ना’ ने पूरे देश में रह रहे फिलिस्तीनी अल्पसंख्यकों को जगा दिया।
आंकड़े डराने वाले हैं। साल 2025 में इजरायल के भीतर ही 252 फिलिस्तीनी नागरिक आपसी गैंगवार और अपराध में मारे गए। आरोप है कि इजरायल की सरकार इन मौतों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस केवल यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि यह “अरब लोगों का आपसी मामला” है। लेकिन हकीकत यह है कि इन इलाकों में अपराधियों ने अपनी समानांतर सरकार बना ली है, जहां लोग बैंकों के बजाय इन गैंग्स से कर्ज लेने को मजबूर हैं।
इजरायली संसद की सदस्य आयडा तोमा-सुलेमान का कहना है कि यह केवल कुछ हत्याओं का मामला नहीं है, बल्कि हजारों परिवार डर के साये में जी रहे हैं। इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर ईतामार बेन-ग्वीर, जो खुद अपनी फिलिस्तीन विरोधी छवि के लिए जाने जाते हैं, पर अब इस अपराध को रोकने की जिम्मेदारी है। हालांकि, प्रदर्शनकारी उन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।
प्रदर्शन में शामिल लोगों के हाथों में जो बैनर थे, वे दिल दहला देने वाले थे— “हमें और खामोशी नहीं चाहिए,” “अरबों की जान की भी कीमत है।” सामाजिक कार्यकर्ता हसन जबारीन कहते हैं कि इजरायल में एक यहूदी बच्चा चैन की नींद सोता है, लेकिन एक फिलिस्तीनी बच्चा रात भर चलने वाली गोलियों की आवाज से डरा रहता है। उसे स्कूल जाते समय यह डर सताता है कि कहीं वह किसी गैंगवार का शिकार न हो जाए। यह आंदोलन इसी डर को खत्म करने की एक निर्णायक लड़ाई है।
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