मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इजरायल के सबसे करीबी सहयोगी माने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेस्ट बैंक के इजरायल में विलय (Annexation) की कोशिशों का विरोध किया है। व्हाइट हाउस की ओर से आए इस ताजा बयान ने इजरायली सरकार के उन दक्षिणपंथी नेताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जो ट्रंप प्रशासन के आने के बाद वेस्ट बैंक पर पूरी तरह कब्जा जमाने का सपना देख रहे थे।
सोमवार को व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वेस्ट बैंक में स्थिरता चाहते हैं। अधिकारी के मुताबिक, “एक स्थिर वेस्ट बैंक ही इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है और यह इस प्रशासन के क्षेत्रीय शांति के लक्ष्य के अनुरूप है।” अमेरिका का यह रुख बताता है कि ट्रंप भले ही इजरायल के कट्टर समर्थक हों, लेकिन वे ऐसे किसी भी कदम के पक्ष में नहीं हैं जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाए।
मामला तब गरमाया जब इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने वेस्ट बैंक में नियंत्रण बढ़ाने के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी। इन नियमों के तहत निर्माण परमिट और प्रमुख धार्मिक स्थलों का नियंत्रण फिलिस्तीनी अथॉरिटी से छीनकर सीधे इजरायल को सौंपने की तैयारी की गई है। स्मोट्रिच ने तो यहां तक कह दिया कि उनका मकसद “फिलिस्तीनी राष्ट्र के विचार को हमेशा के लिए दफन करना” है।
इजरायल के इस कदम के बाद दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सऊदी अरब, कतर, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात समेत आठ मुस्लिम देशों ने एक साझा बयान जारी कर इजरायल की इन हरकतों को ‘अवैध कब्जा’ करार दिया है। वहीं, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भी चेतावनी दी है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इजरायल के इन फैसलों को क्षेत्र के लिए ‘अस्थिर’ करने वाला बताया है।
व्हाइट हाउस का यह बयान इजरायल के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अमेरिका का मानना है कि वेस्ट बैंक में किसी भी तरह का एकतरफा बदलाव हिंसा को जन्म दे सकता है और शांति की कोशिशों को खत्म कर सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या इजरायल का दक्षिणपंथी धड़ा अपने सबसे बड़े मददगार की इस सलाह को मानता है या अपने विस्तारवादी एजेंडे पर आगे बढ़ता है।
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