नई दिल्ली: रिकॉर्ड बनते ही हैं टूटने के लिए, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जो ‘मील का पत्थर’ साबित होते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट सत्र में लगातार 9वीं बार बजट पेश करने जा रही हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, यह उनकी कार्यशैली और सरकार के उन पर अटूट भरोसे का प्रतीक है।
मोरारजी देसाई से आगे अब तक सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम था (कुल 10, लेकिन लगातार 6)। निर्मला सीतारमण ने ‘लगातार’ बजट पेश करने के मामले में उन्हें काफी पीछे छोड़ दिया है। कोरोना काल की मंदी हो या वैश्विक युद्ध का असर, उन्होंने हर चुनौती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की नाव को संभाले रखा है।
जनता को क्या उम्मीद? इस ऐतिहासिक मौके पर देश की नजर रिकॉर्ड पर कम और अपनी जेब पर ज्यादा है।
- मिडिल क्लास: क्या 9वें बजट में टैक्स स्लैब में कोई बड़ी राहत मिलेगी?
- महिलाएं: देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री से महिलाओं को विशेष पैकेज की उम्मीद है।
- किसान और युवा: रोजगार और खेती को लेकर बड़े ऐलान की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह सरकार के इस कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण बजट है, इसलिए वित्त मंत्री ‘पॉपुलिज्म’ (लोकलुभावन वादों) की जगह ‘ग्रोथ’ (विकास) पर जोर देंगी। लाल कपड़े में लिपटे उस टैबलेट में इस बार क्या निकलेगा, इसका इंतजार पूरा देश कर रहा है।
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