वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। मानवाधिकार संगठनों (HRANA) के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों से जारी इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 646 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 512 प्रदर्शनकारी और 134 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाते हुए सैन्य हमले की संभावना जताई है।

ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा, “ईरानी देशभक्तों, विरोध प्रदर्शन जारी रखो—अपने संस्थानों पर कब्जा कर लो!!! हत्यारों और दुर्व्यवहार करने वालों के नाम याद रखना, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। मदद आ रही है।” ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्या नहीं रुकती, तब तक वह ईरानी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेंगे।

व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम, जिसमें उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं, ईरान के खिलाफ ‘मजबूत विकल्पों’ पर विचार कर रहे हैं। इन विकल्पों में सीधे सैन्य हमले, साइबर युद्ध और ईरानी विपक्ष को तकनीकी सहायता देना शामिल है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने हिंसा के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही उन देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे।तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने बल प्रयोग किया, तो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने “वैध लक्ष्य” होंगे।
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