यरूशलेम/तेहरान, 11 जनवरी, 2026 – मध्य-पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरा गए हैं। इजराइल ने अपनी सीमाओं और रक्षा प्रणालियों को “मैक्सिमम अलर्ट” पर रख दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब ऐसी खबरें आईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में जारी जन-विद्रोह को कुचलने के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
नेतन्याहू और मार्को रुबियो की बातचीत शनिवार को इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा का मुख्य केंद्र ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावनाएं और उसके बाद पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियां थीं। हालांकि इजराइल ने सीधे तौर पर इस मामले में दखल देने के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन वह किसी भी जवाबी हमले से निपटने के लिए तैयार है।
ईरान का पलटवार ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने रविवार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल अब उनके “वैध लक्ष्य” (Legitimate Targets) हैं। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की हिमाकत की, तो इजराइल और इस क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी जहाजों और अड्डों को तबाह कर दिया जाएगा।”
तनाव का बैकग्राउंड ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों में अब तक 116 लोगों की मौत हो चुकी है। जून 2025 में इजराइल और ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के बीच तनाव इस स्तर पर पहुंचा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वे ईरान के सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही हिंसा पर नजर रखे हुए हैं और ट्रंप “ईरानी लोगों की आजादी” के लिए सैन्य विकल्प खुले रखे हुए हैं।
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