तेहरान/वाशिंगटन, 10 जनवरी, 2026 – ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े जन-विद्रोह का सामना कर रहा है। तेहरान के बाजारों से शुरू हुआ आर्थिक विरोध अब पूरे देश में फैल चुका है और लोग सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। चश्मदीदों के अनुसार, शुक्रवार रात सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर ‘मिलिट्री राइफलों’ से अंधाधुंध फायरिंग की, जिसके बाद अस्पतालों में लाशों के ढेर लग गए हैं।
भारी जनहानि और गिरफ्तारियां मानवाधिकार संस्था HRANA के अनुसार, पिछले 14 दिनों में 116 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने अब तक 2,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। तेहरान के फारबी आई हॉस्पिटल में 200 से अधिक ऐसे मरीज पहुंचे हैं जिनकी आंखों में छर्रे लगे हैं।

ब्लैकआउट और वैश्विक तनाव ईरानी प्रशासन ने 8 जनवरी से पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप कर दी हैं ताकि प्रदर्शन की खबरें बाहर न जा सकें। सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के पीछे “विदेशी ताकतों” का हाथ बताया है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने निहत्थे लोगों पर हिंसा बंद नहीं की, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हालिया गिरफ्तारी के बाद ट्रंप की इस धमकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
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