1. आपातकालीन जेल गए नेताओं को अब नहीं मिलेगी सम्मान राशि
अब आपातकाल के दौरान जेल गए नेताओं को दी जाने वाली मासिक सम्मान राशि समाप्त कर दी गई है। राष्ट्रपति ने लोकतंत्र प्रहरी विधेयक के निरसन का प्रस्ताव मंजूर किया, जिससे पूर्व नियम पूरी तरह हट गया है। सुक्खू सरकार ने अप्रैल 2023 में बिल पास कर यह योजना बंद कर दी थी। पहले 12,000 और 20,000 रुपये की राशि मुख्यमंत्री शांता कुमार और 105 अन्य नेताओं को मिलती थी, जिसे नए कानून के बाद वापस ले लिया गया।
2. हिमाचल में नए शहरी निर्माण नियम लागू – अब नहीं चलेगा मनमर्जी से निर्माण
नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग हिमाचल प्रदेश ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नियम, 2014 में सोलहवां संशोधन (2025) का मसौदा जारी किया है। इसमें प्लॉट आकार, फ्लोर एरिया अनुपात, सेटबैक और भवन ऊंचाई जैसे कई बदलाव शामिल हैं। नए नियमों के अनुसार सभी निर्माणों के लिए मालिकाना प्रमाण पत्र जरूरी होगा, साथ ही NOC, ऑक्यूपेंसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। ये बदलाव शहरी नियोजन और गुणवत्तापूर्ण निर्माण को बढ़ावा देंगे।
3. हिमाचल विद्युत बोर्ड कर्मियों के ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन में भेजने पर रोक
हिमाचल हाईकोर्ट ने विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को HPPTCL में ट्रांसफर करने संबंधी सरकार की अधिसूचना पर तत्काल रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार, HPPTCL व अन्य पक्षों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका में तर्क रखा गया कि अनुबंधित कर्मचारियों का स्थानांतरण उचित प्रक्रिया के बिना नहीं किया जा सकता। बिजली बोर्ड में अब केवल 13,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।
4. चुराह विधायक हंसराज पर FIR – युवती ने लगाया शोषण का आरोप
चुराह से भाजपा विधायक हंसराज के खिलाफ एक युवती ने शारीरिक शोषण और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने पॉक्सो व IPC की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की है व युवती का बयान अदालत में भी दर्ज किया गया है। युवती के पिता ने विधायक के निजी सचिव समेत दो अन्य लोगों पर भी शिकायत दर्ज कराई है। विधायक ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। महिला आयोग ने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
5. हिमाचल हाईकोर्ट ने पुलिस बी-1 परीक्षा पर लगाई रोक
हिमाचल हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति के लिए 9 नवंबर को प्रस्तावित बी-1 परीक्षा पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिका की गंभीरता को देखते हुए सरकार व पुलिस विभाग से 10 दिन में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि लंबे अंतराल के बाद हो रही परीक्षा में नए अभ्यर्थी तो लाभ पा सकते हैं, लेकिन अनुभवी कर्मचारी पीछे रह जाएंगे। पुलिस विभाग ने अदालत के आदेश के अनुसार परीक्षा फिलहाल रद्द कर दी है।
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