शिमला, 17 मार्च: हिमाचल प्रदेश की हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य में सभी कैबिनेट रैंक पदों को समाप्त कर दिया है। इस संबंध में शिमला से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
सरकार के इस आदेश के तहत विभिन्न बोर्ड, निगम, समितियों और सलाहकार पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को दिया गया कैबिनेट रैंक अब समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही उनसे जुड़ी सभी सरकारी सुविधाएं — जैसे वाहन, स्टाफ और प्रोटोकॉल — भी तुरंत प्रभाव से वापस ले ली गई हैं।
इस फैसले का असर उन सभी व्यक्तियों पर पड़ेगा जिन्हें अब तक कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा दिया गया था, लेकिन वे निर्वाचित मंत्री नहीं थे। सभी विभागों को आदेश का तत्काल पालन करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
किन-किन लोगों पर पड़ा असर
मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी नियुक्तियों के अनुसार, जिन प्रमुख लोगों को पहले कैबिनेट रैंक दिया गया था, उनमें शामिल हैं:
- नरेश चौहान — मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार
- गोकुल बुटेल — आईटी, इनोवेशन और डिजिटल गवर्नेंस सलाहकार
- सुनील शर्मा — राजनीतिक सलाहकार
- आर.एस. बाली — पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के चेयरमैन
- भवानी सिंह पठानिया — राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष
- केहर सिंह खाची — वन विकास निगम के उपाध्यक्ष
इसके अलावा कई बोर्डों, निगमों और आयोगों के चेयरमैन व उपाध्यक्ष भी इस फैसले से प्रभावित हुए हैं।
प्रशासनिक सुधार और खर्च में कटौती
हिमाचल में लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक नियुक्तियों को कैबिनेट रैंक देकर मंत्री स्तर की सुविधाएं दी जाती रही हैं। इससे सरकारी खर्च में बढ़ोतरी होती थी।
सरकार के इस नए फैसले को प्रशासनिक ढांचे को सरल बनाने और वित्तीय अनुशासन लागू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि नोटिफिकेशन में विस्तृत कारण नहीं दिए गए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार खर्च कम करना एक बड़ा कारण है।
राजनीतिक असर भी संभव
इस फैसले से राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ सकती है, क्योंकि कैबिनेट रैंक पद अक्सर पार्टी नेताओं और समर्थकों को समायोजित करने के लिए दिए जाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगा, लेकिन इससे प्रभावित नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।
क्या है कैबिनेट रैंक?
कैबिनेट रैंक एक विशेष दर्जा होता है, जिसके तहत किसी गैर-मंत्री को मंत्री के बराबर सुविधाएं दी जाती हैं। इसमें सरकारी वाहन, स्टाफ, आवास और प्रोटोकॉल शामिल होते हैं।
अब इस दर्जे को समाप्त करने के बाद राज्य में केवल चुने हुए मंत्री ही इन सुविधाओं के हकदार रहेंगे।
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