विश्व पर्यटन दिवस 2025 के अवसर पर केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पर्यटन सप्ताह उत्सव के अंतर्गत पाँचवें दिन विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस आयोजन का मुख्य विषय “पर्यटन और सतत रूपांतरण” था, जिसकी मेजबानी विश्वविद्यालय के पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन विभाग ने की। कार्यक्रम की शुरुआत Stakeholders Conclave से हुई, जिसमें पर्यटन, पर्यावरण और सांस्कृतिक क्षेत्र के विशेषज्ञों, अधिकारियों तथा विद्यार्थियों ने सतत पर्यटन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
इसके बाद राष्ट्रीय पर्यटन कौशल क्विज़ प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया। दिन का समापन एक Treasure Hunt प्रतियोगिता के साथ हुआ, जिसमें 25 टीमों के करीब 75-80 छात्रों ने हिस्सा लिया। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं टीमवर्क, रचनात्मकता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने में कारगर साबित हुईं।
मुख्य अतिथि, कुलपति प्रो. (डॉ.) सत प्रकाश बंसल के साथ, छात्र कल्याण के अधिष्ठाता प्रो. सुनील ठाकुर ने कहा कि पर्यटन सिर्फ आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समावेशन का माध्यम भी है। उन्होंने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिए “Reduce, Reuse, Recycle” की नीति अपनाने और सजग पर्यटक बनने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि, पर्यटन विकास अधिकारी श्री विनय धीमान ने बताया कि पर्यटन ग्रामीण से शहरी प्रवास को रोक सकता है और रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।
हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी इंजीनियर वरुण गुप्ता ने पर्यावरणीय कानूनों, प्रदूषण नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट्स पर विस्तृत जानकारी दी। Waste Warriors टीम ने भी सतत जीवनशैली और समुदाय आधारित कचरा प्रबंधन के महत्व पर छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें छात्रों ने पर्यटन और पर्यावरण से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों से संवाद किया और पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने की नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। इस आयोजन का सफल संचालन प्रो. देबासिस साहू और सह-संयोजक प्रो. अमित गंगोटिया ने किया। केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पर्यटन सप्ताह अब पाठ्यक्रमीय और व्यावहारिक ज्ञान का संगम बन चुका है, जो सतत विकास लक्ष्यों और भारत के “विकसित भारत @2047” मिशन के साथ भी जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य ऐसे स्नातक तैयार करना है जो शैक्षणिक, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से सक्षम हों और सतत पर्यटन को प्रोत्साहित करें।
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