वॉशिंगटन/रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी जमीनी सैन्य तैनाती को लेकर अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। पहले जहां ट्रंप ने “बूट्स ऑन ग्राउंड” यानी जमीनी सैनिक भेजने से परहेज की बात कही थी, वहीं ताजा घटनाक्रम के बाद उन्होंने सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार सभी विकल्प खुले रखने की बात कही है।
रियाद में अमेरिकी दूतावास परिसर के बाहर हुए हमले में सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हमले में दूतावास के भीतर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घटना ने क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। सऊदी अधिकारियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
ट्रंप का बदला बयान
हमले के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने राजनयिक मिशनों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता पड़ी, तो प्रशासन उस पर विचार करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी निर्णय से पहले सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा विभाग से विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
ट्रंप ने पहले सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि अमेरिका पश्चिम एशिया में जमीनी सैनिकों की तैनाती से बचना चाहता है और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर कूटनीतिक और सीमित सैन्य विकल्पों पर काम करेगा। ताजा बयान को विश्लेषक उनके रुख में आंशिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

रियाद में क्या हुआ?
अमेरिकी दूतावास के बाहर हुए हमले की जिम्मेदारी किसने ली है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि घटना की जांच जारी है और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय किया जा रहा है। सऊदी सुरक्षा बलों ने हमले को विफल करने का दावा किया है और संदिग्धों को हिरासत में लेने की पुष्टि की है।
विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि दूतावास की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पृष्ठभूमि: ईरान-इजरायल तनाव
पश्चिम एशिया में हाल के सप्ताहों में ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सीमित सैन्य कार्रवाइयों की खबरें सामने आई हैं। अमेरिका पारंपरिक रूप से इजरायल का करीबी सहयोगी रहा है, जबकि ईरान के साथ उसके संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अमेरिकी सैन्य तैनाती स्थिति को और जटिल बना सकती है। वहीं, अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि अपने राजनयिक ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया
अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि फिलहाल किसी बड़े सैन्य तैनाती के आदेश की घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों की समीक्षा की जा रही है।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर अमेरिकी दूतावास पर हमले की निंदा की और कहा कि सऊदी अरब अपने क्षेत्र में स्थित सभी राजनयिक मिशनों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
वैश्विक प्रभाव
रियाद की घटना के बाद वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता देखी गई। तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख क्षेत्र है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं तो ऊर्जा बाजार पर प्रभाव पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने सभी पक्षों से कूटनीतिक माध्यमों के जरिए तनाव कम करने का आग्रह किया है।
जनता पर प्रभाव
क्षेत्र में रहने वाले विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को यात्रा संबंधी परामर्श जारी किया है। वहीं, क्षेत्रीय अस्थिरता का असर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका यदि जमीनी सैनिक भेजने का निर्णय लेता है तो यह एक बड़ा रणनीतिक कदम होगा, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति की समीक्षा जारी रखने और सहयोगी देशों के साथ समन्वय बनाए रखने की बात कही है।
निष्कर्ष
रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि अभी किसी औपचारिक सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा हालात के अनुसार विकल्प खुले रखने के संकेत दिए गए हैं। आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन की अगली रणनीति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
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