वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर दुनिया भर में हलचल तेज कर दी है। ट्रंप ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर “मालिकाना हक” (Ownership) हासिल करना होगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अमेरिका इसे “आसान तरीके” (खरीदकर) या “कठिन तरीके” (बल प्रयोग) से हासिल करेगा।+2
मुख्य बिंदु:
- लीज नहीं, मालिकाना हक जरूरी: ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क के साथ मौजूदा लीज समझौते सुरक्षा के लिए काफी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाजों का जमावड़ा है, जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।+1
- डेनमार्क और नाटो की चेतावनी: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इन धमकियों को “अस्वीकार्य” बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपने ही नाटो सहयोगी के खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करता है, तो यह नाटो सैन्य गठबंधन का अंत होगा।
- ग्रीनलैंड का जवाब: ग्रीनलैंड के राजनीतिक दलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा, “हम न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं और न ही डेन (Danes); हम ग्रीनलैंडिक ही रहना चाहते हैं। हमारे भविष्य का फैसला केवल हमारे लोग ही करेंगे।”
- रणनीतिक महत्व: आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड न केवल मिसाइल वार्निंग सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals), तेल और गैस के विशाल भंडार भी मौजूद हैं।
अमेरिका का पहले से ही ग्रीनलैंड के उत्तरी हिस्से में ‘पिटुफिक स्पेस बेस’ (Pituffik Base) है, लेकिन ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन को पड़ोसी बनने से रोकने के लिए पूर्ण नियंत्रण आवश्यक है।
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