नई दिल्ली, 13 मार्च — सुप्रीम कोर्ट ने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 2022 में हुई हत्या के मामले में दो आरोपियों पवन बिश्नोई और जगतार सिंह को जमानत दे दी है। इस फैसले को देश के चर्चित आपराधिक मामलों में एक अहम कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के बाद दिया, जिसमें दोनों आरोपियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि मामले में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज होने के बाद ही जमानत पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने लंबी न्यायिक हिरासत और मुकदमे की धीमी प्रगति को ध्यान में रखते हुए राहत देने का फैसला किया।

आरोपियों पर क्या हैं आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार पवन बिश्नोई पर आरोप है कि उसने उस महिंद्रा बोलेरो वाहन की व्यवस्था की थी जिसका इस्तेमाल हमलावरों ने हत्या के दौरान किया। बताया जाता है कि इस वाहन को कनाडा में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के निर्देश पर उपलब्ध कराया गया था।
बिश्नोई के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को एक अन्य मामले में दिए गए बयान के आधार पर गलत तरीके से फंसाया गया है और उनका जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
दूसरे आरोपी जगतार सिंह पर आरोप था कि उसने कथित रूप से गायक की गतिविधियों की जानकारी हमलावरों तक पहुंचाई। बचाव पक्ष का कहना है कि वह केवल मूसेवाला का पड़ोसी था और घटना की साजिश या रेकी से उसका कोई संबंध नहीं था।
2022 में हुई थी सनसनीखेज हत्या
पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू, जिन्हें दुनिया सिद्धू मूसेवाला के नाम से जानती है, की 29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले के जवाहरके गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय वह अपनी गाड़ी चला रहे थे, जब हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं।
इस हत्या ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी और पंजाब पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान इस मामले को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी गैंगवार से जोड़ा गया, जबकि गोल्डी बराड़ ने सोशल मीडिया के माध्यम से हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

लंबी सुनवाई और धीमी ट्रायल प्रक्रिया
अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार इस मामले में करीब 180 गवाह सूचीबद्ध हैं। इतने बड़े मामले में साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया लंबी चल रही है, जिसके कारण मुकदमे की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि तीन साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने और ट्रायल के अभी लंबा चलने की संभावना को देखते हुए जमानत दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर की।
आगे क्या होगा
हालांकि जमानत मिलने के बावजूद मूसेवाला हत्याकांड की सुनवाई जारी रहेगी। मामले में कई अन्य आरोपी अब भी जेल में हैं और जांच एजेंसियां इस घटना से जुड़े संगठित अपराध नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है और मामले में अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही आएगा।
Discover more from Enoxx News (Hindi)
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
