गीर सोमनाथ/नई दिल्ली, 11 जनवरी, 2026 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर बड़ा बयान दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब जिस तरह की ताकतों ने अड़चनें डाली थीं, वैसी ही विचारधाराएं आज भी सक्रिय हैं।
इतिहास और संकल्प की शक्ति पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारत के संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सोमनाथ को कई बार नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार यह अपनी आध्यात्मिक शक्ति से उठ खड़ा हुआ। सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में जब इसका पुनर्निर्माण हो रहा था, तब भी कुछ लोग इसके खिलाफ थे। हमें यह समझना होगा कि वे ताकतें अभी खत्म नहीं हुई हैं, वे बस अपना स्वरूप बदल चुकी हैं।”
विरासत पर गर्व और विकास प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी देश अपनी विरासत का अपमान करके आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे उन ताकतों को पहचानें जो भारत के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को बाधित करना चाहती हैं। उन्होंने सोमनाथ क्षेत्र में चल रहे आधुनिक विकास कार्यों का भी उल्लेख किया, जिससे श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल रही हैं।
सांस्कृतिक चेतना का पुनरुद्धार पीएम मोदी के अनुसार, सोमनाथ का विकास केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं है, बल्कि यह भारत की सामूहिक चेतना का पुनरुद्धार है। उन्होंने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने से न केवल आस्था मजबूत होती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलती है।
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