क्या चीन का सबसे ताकतवर AI मॉडल दरअसल अमेरिका की ‘चोरी’ पर टिका है? यह सवाल हम नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनी OpenAI पूछ रही है। शुक्रवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में, OpenAI ने अमेरिकी संसद (Congress) को एक खुफिया मेमो सौंपा है, जिसमें चीनी कंपनी DeepSeek पर ‘डिजिटल डकैती’ का आरोप लगाया गया है।
क्या है ‘डिस्टिलेशन’ (Distillation) का खेल? इस पूरे विवाद की जड़ एक तकनीक है जिसे ‘डिस्टिलेशन’ कहते हैं। आसान भाषा में समझें तो यह नकल करने का हाई-टेक तरीका है। OpenAI का आरोप है कि DeepSeek के इंजीनियरों ने ChatGPT के सबसे महंगे और एडवांस मॉडल्स से लाखों सवाल पूछे। जब ChatGPT ने जवाब दिए, तो उन जवाबों को DeepSeek ने अपने खुद के AI (DeepSeek V4) को सिखाने के लिए इस्तेमाल किया।
यानी, मेहनत और अरबों डॉलर खर्च किए अमेरिका ने, और उसकी ‘बुद्धिमानी’ को कॉपी करके चीन ने अपना सस्ता मॉडल तैयार कर लिया। OpenAI ने इसे “सफेद झूठ और जासूसी” करार दिया है।
V4 का डर और अमेरिका की बौखलाहट यह विवाद ऐसे समय पर खड़ा हुआ है जब DeepSeek अपना नया मॉडल ‘DeepSeek V4’ लॉन्च करने वाला है। टेक जगत में चर्चा है कि यह नया मॉडल कोडिंग (Coding) में उस्ताद है और यह अमेरिका के GPT-5 को भी टक्कर दे सकता है।
समस्या यह है कि अगर चीन का यह मॉडल वाकई इतना ताकतवर निकला, तो अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों का धंधा चौपट हो सकता है। कोई 2000 रुपये महीना देकर ChatGPT क्यों इस्तेमाल करेगा, जब चीन वही काम 100 रुपये में या मुफ्त में करके देगा?
सुरक्षा का खतरा OpenAI ने अमेरिकी सरकार को यह भी चेतावनी दी है कि यह सिर्फ पैसों की बात नहीं है। जब कोई मॉडल चोरी के डेटा से बनता है, तो उसमें से ‘सुरक्षा फिल्टर’ हट जाते हैं। इसका मतलब है कि इस चीनी AI का इस्तेमाल साइबर हमले या बायो-वेपन (Bio-Weapon) बनाने की जानकारी हासिल करने के लिए भी किया जा सकता है, जिसे अमेरिकी मॉडल रोक देते हैं।
फिलहाल, चीन की तरफ से इस पर कोई सफाई नहीं आई है। लेकिन एक बात तय है—तकनीक की यह लड़ाई अब सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं रही, यह दो महाशक्तियों के बीच की जंग बन चुकी है।
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