लद्दाख की आवाज़ बुलंद करने वाले मशहूर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पिछले करीब पांच महीनों से जेल की सलाखों के पीछे हैं। उनकी सेहत और लगातार बढ़ती हिरासत को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने साफ कहा कि वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट “अच्छी नहीं” है, ऐसे में सरकार को उनकी नजरबंदी पर दोबारा विचार करना चाहिए।
सोनम वांगचुक को सितंबर 2025 में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को भड़काया, जिससे हिंसा भड़की। फिलहाल वे राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने इस हिरासत को “अवैध” बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने दलील दी कि वांगचुक की सेहत बिल्कुल ठीक है और उन्हें जोधपुर AIIMS में बेहतरीन इलाज मिल रहा है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि लद्दाख में उन्हें ऐसी चिकित्सा सुविधाएं कभी नहीं मिल पातीं। हालांकि, कोर्ट सरकार की इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया।
जस्टिस वराले ने सरकार को याद दिलाया कि किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक बिना ठोस कानूनी आधार के कैद में रखना लोकतंत्र के लिए “खतरनाक रास्ता” हो सकता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या एक 58 वर्षीय व्यक्ति, जिसने दशकों तक शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया, उसे इस तरह जेल में रखना सही है?
अब इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। कोर्ट ने प्रशासन से वो सभी मूल फाइलें मंगवाई हैं, जिनके आधार पर वांगचुक पर NSA लगाया गया था। लद्दाख के लोग और पर्यावरण प्रेमी इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि लद्दाख के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
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