मुंबई: क्या आपने कभी सोचा है कि भविष्य की फैक्ट्रियों में धुआं नहीं, बल्कि डेटा निकलेगा? एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग के मुताबिक, भारत इसी भविष्य की दहलीज पर खड़ा है। मुंबई में आयोजित एनवीडिया एआई समिट (Nvidia AI Summit) के दौरान, हुआंग ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के साथ मंच साझा करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक नई तस्वीर पेश की।
हुआंग का मानना है कि भारत, जो अब तक दुनिया के लिए ‘सॉफ्टवेयर’ लिखता था, अब जल्द ही दुनिया के लिए ‘इंटेलिजेंस’ (बुद्धिमत्ता) का निर्माण करेगा। और यह बदलाव भारत में नौकरियों की एक ऐसी बाढ़ लाएगा, जो शायद इंटरनेट युग से भी बड़ी होगी।
‘डेटा सेंटर’ नहीं, ‘इंटेलिजेंस फैक्ट्री’ कहिए
जेन्सन हुआंग ने एक बहुत ही दिलचस्प नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा, “भविष्य में डेटा सेंटर ही नई फैक्ट्रियां होंगी।”
इस बात को ऐसे समझिए: जैसे एक कपड़ा मिल में कपास (raw material) जाता है और कपड़ा बनकर निकलता है, वैसे ही इन नई फैक्ट्रियों में ‘डेटा’ जाएगा और वहां से ‘AI’ या ‘इंटेलिजेंस’ बनकर निकलेगा। हुआंग ने जोर देकर कहा कि भारत के पास डेटा का भंडार है और दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट भी। अब भारत को सिर्फ सर्विस देने वाला देश नहीं बने रहना है, बल्कि उसे ‘AI का मैन्युफैक्चरर’ बनना है।
सिर्फ कोडर्स की नहीं, सबकी जरूरत होगी
अक्सर यह डर फैलाया जाता है कि AI लोगों की नौकरियां खा जाएगा। लेकिन हुआंग ने इसके ठीक उलट बात कही। उन्होंने 90 के दशक का उदाहरण दिया। जब इंटरनेट आया था, तो लोगों को लगा था कि नौकरियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन इंटरनेट ने करोड़ों नए तरह के रोजगार पैदा किए।
हुआंग ने साफ किया कि इन ‘AI फैक्ट्रियों’ को चलाने के लिए सिर्फ कंप्यूटर इंजीनियरों की जरूरत नहीं होगी। “आपको AI युग में सफल होने के लिए C++ प्रोग्रामर होने की जरूरत नहीं है,” उन्होंने कहा।
आने वाले समय में डोमेन एक्सपर्ट्स (विषय विशेषज्ञों) की मांग सबसे ज्यादा होगी। चाहे वह जीव विज्ञानी (biologist) हो, किसान हो, डिजाइनर हो या चार्टर्ड अकाउंटेंट—इन सबको AI को ‘सिखाना’ होगा। यानी, अगर आप अपने काम में माहिर हैं, तो AI आपकी नौकरी नहीं लेगा, बल्कि आप AI का इस्तेमाल करके अपनी उत्पादकता को कई गुना बढ़ा लेंगे।
भारत का ‘मेक इन इंडिया’ मोमेंट
मुकेश अंबानी के साथ बातचीत में यह बात उभरकर आई कि भारत के पास एक अनोखा मौका है। रिलायंस और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां विशाल डेटा सेंटर बना रही हैं। इसका मतलब है कि भारत में AI का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है।
हुआंग का संदेश साफ है: भारत को अब पश्चिमी देशों से टेक्नोलॉजी आयात करने की जरूरत नहीं है। भारत अपनी खुद की AI तकनीक बना सकता है और पूरी दुनिया को निर्यात (export) कर सकता है।
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