शिमला, 10 जनवरी, 2026 – राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) के फोरलेन निर्माण कार्य में पर्यावरणीय मानकों की धज्जियां उड़ाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और NHAI सहित निर्माण में लगी अन्य एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला? शिमला ग्रामीण तहसील के मशोबरा और लिंडी-धार क्षेत्र के किसानों और भू-स्वामियों ने NGT में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि NH-5 का चौड़ीकरण बेहद संवेदनशील और अस्थिर ढलानों (लगभग 70 डिग्री) पर किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, एजेंसियां बिना किसी सुरक्षा दीवार या उचित डंपिंग साइट के काम कर रही हैं, जिससे लगातार भूस्खलन हो रहा है और उनकी उपजाऊ कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
अदालत का आदेश NGT ने माना कि आवेदन में उठाए गए मुद्दे पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत गंभीर हैं। ट्रिब्यूनल ने निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि:
- काम के दौरान पर्यावरण और जन-माल की सुरक्षा के सभी पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
- पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।
अदालत ने आवेदक को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पूर्व सेवा का शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अब 9 फरवरी, 2026 को तय की गई है।
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