जिनेवा, 22 मार्च: संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष कोविड-19 के बाद दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर सकता है। इस स्थिति से वैश्विक राहत प्रणाली पर भारी दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के अनुसार, यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और सहायता तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक राहत प्रणाली पर बढ़ता दबाव
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि पहले से ही कोविड महामारी, जलवायु संकट और अन्य युद्धों के कारण राहत एजेंसियां दबाव में हैं। यदि मिडिल ईस्ट में स्थिति बिगड़ती है, तो यह सिस्टम अपनी क्षमता से बाहर जा सकता है।
लाखों लोगों के विस्थापन, भूख और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का खतरा बढ़ सकता है। मौजूदा संसाधन इतनी बड़ी आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते।
खाद्य और स्वास्थ्य सेवाओं पर खतरा
मिडिल ईस्ट क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो राहत सहायता पर निर्भर हैं।
यदि सप्लाई चेन बाधित होती है, तो खाद्य संकट गहरा सकता है। स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, जिससे कमजोर आबादी पर गंभीर असर पड़ेगा।
इसके अलावा, संघर्ष बढ़ने पर बड़े पैमाने पर विस्थापन हो सकता है, जिससे शरणार्थी संकट पैदा होने की आशंका है।
फंडिंग और संसाधनों की चुनौती
संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि लगातार संकटों के कारण वैश्विक स्तर पर फंडिंग की कमी और ‘डोनर फटीग’ बढ़ रही है।
ऐसी स्थिति में नई आपदा के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना मुश्किल हो सकता है। राहत एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की है।
वैश्विक असर की संभावना
यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खाद्य और ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
विशेष रूप से विकासशील देशों पर इसका असर अधिक होगा, जो आयात पर निर्भर हैं।
तनाव कम करने की अपील
संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।
समय रहते कदम उठाने से इस संभावित संकट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
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