नई दिल्ली, 22 मार्च: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय कंपनियों पर भी दिखने लगा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अनुसार, कंपनियों को शिपमेंट में देरी और कच्चे माल की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
CII ने कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, खासकर उन उद्योगों में जो तेल और उससे जुड़े उत्पादों तथा अन्य महत्वपूर्ण कच्चे माल के आयात पर निर्भर हैं।
शिपमेंट और लॉजिस्टिक्स में बाधा
मिडिल ईस्ट वैश्विक व्यापार मार्गों का अहम केंद्र है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे माल की डिलीवरी में देरी हो रही है।
कई कंपनियों ने बताया है कि उन्हें समय पर सामान नहीं मिल पा रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। निर्यात करने वाली कंपनियों को भी समय पर ऑर्डर पूरा करने में कठिनाई हो रही है।
कच्चे माल की कमी बढ़ी चिंता
CII के अनुसार, कई उद्योगों में जरूरी कच्चे माल की कमी होने लगी है। पेट्रोकेमिकल, फार्मा, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस समस्या से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
कंपनियां अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही हैं, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है। लंबे समय तक संकट रहने पर उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बढ़ती लागत और महंगाई का दबाव
सप्लाई चेन में बाधा के कारण कंपनियों की लागत बढ़ रही है। शिपिंग चार्ज बढ़ने लगे हैं और कच्चा माल महंगा हो रहा है।
इसका असर आगे चलकर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।
उद्योग की सरकार से मांग
CII ने सरकार से स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। उद्योग जगत चाहता है कि वैकल्पिक सप्लाई चैन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से इस संकट का प्रभाव कम किया जा सकता है।
आगे की स्थिति पर नजर
स्थिति अभी विकसित हो रही है और इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तनाव कितने समय तक बना रहता है।
फिलहाल कंपनियां सतर्क हैं और अपने जोखिम को कम करने के लिए नए उपाय अपना रही हैं।
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