नई दिल्ली: भारत के ग्रामीण परिदृश्य में पिछले दो दशकों से सबसे बड़ा सहारा रही ‘मनरेगा’ (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का अध्याय अब समाप्त हो गया है। दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित नए कानून के बाद, अब देश में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण’ यानी VB-G RAM G (वीबी-जी राम जी) लागू हो चुका है।
यह केवल एक योजना का नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा के ढांचे में पिछले 20 सालों का सबसे बड़ा बदलाव है। लेकिन, इस जटिल नाम और इसके उच्चारण (जो ‘राम जी’ जैसा ध्वनित होता है) के पीछे एक गहरी सियासी और प्रशासनिक लड़ाई छिड़ी हुई है।

क्या है VB-G RAM G? (नए कानून की मुख्य बातें)
सरकार का तर्क है कि 2005 का भारत और 2025 का भारत अलग है, इसलिए कानून भी नया होना चाहिए। ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को ध्यान में रखते हुए इस नए कानून में कई बड़े बदलाव किए गए हैं:
- 125 दिनों की गारंटी: पुरानी मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, जिसे बढ़ाकर अब 125 दिन प्रति परिवार कर दिया गया है।
- ‘हार्वेस्ट पॉज’ (Harvest Pause): यह सबसे विवादित प्रावधान है। इसके तहत, राज्यों को अधिकार दिया गया है कि वे बुवाई और कटाई के पीक सीजन के दौरान योजना को 60 दिनों तक रोक सकते हैं। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को मजदूरों की कमी नहीं होगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह मजदूरों के अधिकारों का हनन है।
- फंडिंग का नया गणित: पहले अकुशल मजदूरी का 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। नए ढांचे में कुल फंड का 60:40 (केंद्र:राज्य) का अनुपात तय किया गया है, जिससे राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
- संपत्ति निर्माण पर जोर: अब केवल “गड्ढे खोदने” का काम नहीं होगा। योजना का फोकस टिकाऊ संपत्ति (Durable Assets) जैसे जल संरक्षण ढांचे और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर अनिवार्य कर दिया गया है।
सियासत: गांधी का नाम हटा, ‘राम जी’ की एंट्री?
इस बदलाव ने देश में एक बड़े राजनीतिक तूफ़ान को जन्म दिया है। योजना के नाम से “महात्मा गांधी” को हटाकर एक ऐसा संक्षिप्त नाम (Acronym) चुना गया है—VB-G RAM G—जो बोलने में “वीबी जी राम जी” जैसा लगता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार का एक स्पष्ट वैचारिक संदेश मान रहे हैं।
सरकार का पक्ष: “आधुनिकीकरण, राजनीति नहीं”
सत्ताधारी भाजपा का कहना है कि विपक्ष बेवजह का हंगामा कर रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्रियों ने इसे “प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी” बताया है। सरकार का तर्क है कि:
- पुरानी मनरेगा योजना भ्रष्टाचार, फर्जी जॉब कार्ड और लीकेज से भरी थी।
- नई योजना आधार-लिंक्ड है और पूरी तरह डिजिटल है, जिससे पैसा सीधा असली मजदूर की जेब में जाएगा।
- 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार ग्रामीणों की आय में सीधी बढ़ोतरी करेगा।

विपक्ष का हमला: “विरासत मिटाने की कोशिश”
विपक्ष ने इस कदम को संघीय ढांचे पर हमला और गांधीवादी विचारधारा को मिटाने का प्रयास बताया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार “बापू की विरासत” को ग्रामीण भारत की स्मृति से मिटाना चाहती है।
विपक्ष की चिंताएं केवल नाम तक सीमित नहीं हैं:
- फंडिंग पर सवाल: विपक्ष का आरोप है कि 60:40 के अनुपात से गरीब राज्य यह योजना लागू ही नहीं कर पाएंगे, जिससे अंततः योजना दम तोड़ देगी।
- अधिकारों का हनन: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ‘हार्वेस्ट पॉज’ के नाम पर मजदूरों को उस वक्त काम से वंचित किया जा सकता है जब उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। विपक्ष ने इसे “मजदूरों को बड़े किसानों और उद्योगपतियों का गुलाम बनाने की साजिश” करार दिया है।
विश्लेषण: बदलाव की राह और चुनौतियां
एक आम ग्रामीण मजदूर के लिए योजना का नाम—चाहे वह गांधी हो या राम—से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उसके बैंक खाते में पैसा समय पर आए।
अगर VB-G RAM G बिना किसी भुगतान विलंब के साल में 125 दिन का रोजगार दे पाती है, तो यह गेम-चेंजर साबित होगी। लेकिन, अगर राज्यों ने फंड की कमी का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए, या पीक सीजन में काम रोका गया, तो यह ‘गारंटी’ केवल कागजी साबित हो सकती है। 2026 का साल यह तय करेगा कि यह बदलाव ग्रामीण भारत को ‘विकसित’ बनाता है या फिर उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करता है।
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