बीजिंग, 16 मार्च — ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हुए हमले के बाद चीन में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता वैश्विक तेल बाजारों को प्रभावित कर सकती है।
फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है।
चीन उन देशों में शामिल है जो ईरानी तेल के बड़े खरीदार माने जाते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में होने वाली घटनाओं पर बीजिंग की विशेष नजर रहती है।
ईरान के तेल निर्यात में खार्ग द्वीप की भूमिका
खार्ग द्वीप पर बड़े तेल भंडारण टैंक और निर्यात टर्मिनल मौजूद हैं, जहां से टैंकरों के जरिए कच्चा तेल भेजा जाता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप से होता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
चीन की बढ़ती ऊर्जा चिंता
चीन की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर है। ऐसे में मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता चीन की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि खार्ग द्वीप से तेल आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर चीन सहित कई देशों पर पड़ेगा।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से जुड़ा कोई भी सैन्य या सुरक्षा संकट फारस की खाड़ी और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले तेल परिवहन को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक तेल बाजारों की नजर
ऊर्जा बाजारों में इस तरह की घटनाओं को लेकर तुरंत प्रतिक्रिया देखी जाती है।
तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए ऐसी घटनाएं आर्थिक चिंता का विषय बन जाती हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में खार्ग द्वीप की स्थिति और क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया भर की नजर बनी रहेगी।
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