वॉशिंगटन/यरुशलम, 7 मार्च — ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष शनिवार को दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
लगातार हो रहे हवाई हमलों, मिसाइल हमलों और सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व के कई हिस्सों में अस्थिरता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी
इज़राइल ने हाल के दिनों में ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए कई हमले किए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इज़राइल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। तेहरान का कहना है कि वह अपने खिलाफ हो रही कार्रवाई के जवाब में आत्मरक्षा कर रहा है।
इन हमलों के कारण कई शहरों में सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है और सुरक्षा व्यवस्थाएं कड़ी कर दी गई हैं।
ट्रंप का बयान और बढ़ता दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग वाला बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
वॉशिंगटन में दिए गए बयान में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इज़राइल के समर्थन में खड़ा रहेगा और ईरान को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि इस बयान से राजनीतिक संदेश तो स्पष्ट हुआ है, लेकिन इससे संघर्ष और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
कूटनीतिक प्रयास जारी
संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।
कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, हालांकि अभी तक युद्धविराम को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे, तब तक समाधान की संभावना सीमित रहेगी।
क्षेत्रीय और वैश्विक चिंताएं
मध्य पूर्व के कई देश इस संघर्ष के व्यापक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ऊर्जा बाजार भी इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष अन्य देशों को भी इसमें शामिल कर सकता है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
इज़राइल और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से बना हुआ है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव, सैन्य गतिविधियों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरे मतभेद हैं।
इज़राइल लंबे समय से ईरान पर क्षेत्र में सशस्त्र समूहों का समर्थन करने और मिसाइल क्षमताएं बढ़ाने का आरोप लगाता रहा है।
दूसरी ओर, ईरान इज़राइल पर गुप्त सैन्य कार्रवाइयों और हमलों का आरोप लगाता रहा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
इस संघर्ष के बढ़ने से मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
कई देशों के लिए यह प्राथमिकता बन गई है कि संघर्ष को सीमित रखा जाए और इसे व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से रोका जाए।
आगे क्या हो सकता है
कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि मौजूदा सैन्य गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि तनाव फिलहाल कम होने की संभावना कम है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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