नई दिल्ली, 11 मार्च — ईरान से जुड़े बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के फास्ट-फूड उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की आपूर्ति में संभावित कमी के कारण कई बड़ी रेस्टोरेंट चेन की रसोई संचालन पर दबाव बढ़ सकता है।
बताया जा रहा है कि मैकडॉनल्ड्स और KFC जैसी प्रमुख क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट कंपनियां इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। इन ब्रांडों के अधिकांश आउटलेट अपने किचन संचालन के लिए व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन मार्गों में अनिश्चितता पैदा हुई है, जिसका असर विभिन्न देशों के ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है।
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रेस्टोरेंट उद्योग की चिंता
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कई रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस आपूर्ति में संभावित बाधाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों के सामने चिंता जताई है। व्यावसायिक किचन में लगातार गैस उपलब्ध रहना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इससे भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है।
फास्ट-फूड आउटलेट्स में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में खाना तैयार किया जाता है, जिसके लिए विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता होती है। ऐसे में गैस आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा संचालन पर सीधा असर डाल सकती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
मध्य पूर्व दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति या कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू उद्योगों पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है तो होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को संचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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सरकार से मदद की मांग
रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से व्यावसायिक एलपीजी की प्राथमिक आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि देशभर में लाखों लोग इस उद्योग से जुड़े हैं और रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक इन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि स्थिर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि रेस्टोरेंट सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहें।
कुछ कंपनियां संभावित संकट को देखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों या अतिरिक्त गैस आपूर्ति के विकल्पों पर भी विचार कर रही हैं।
आतिथ्य उद्योग पर व्यापक प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में भारत का क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट उद्योग तेजी से बढ़ा है। महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ब्रांड तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है तो इसका असर भोजन वितरण सेवाओं और रेस्टोरेंट संचालन पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार और ऊर्जा कंपनियां मिलकर आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगी।
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