शिमला | एनॉक्स न्यूज़
हिमाचल प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई और बड़ी क्रांति का आगाज होने जा रहा है। शिमला स्थित प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) में मार्च 2026 से अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होने जा रही है। अटल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (चमियाना) और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज (टांडा) के बाद, आईजीएमसी इस विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक को अपनाने वाला राज्य का तीसरा प्रमुख सरकारी अस्पताल बन जाएगा।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, करीब 28 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से खरीदी गई रोबोटिक मशीन आईजीएमसी पहुंच चुकी है। वर्तमान में इस अत्याधुनिक प्रणाली को अस्पताल के बी-ब्लॉक (Block B) स्थित कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के ऑपरेशन थियेटर में स्थापित किया जा रहा है।
मरीजों के लिए इस सुविधा को सुचारू रूप से शुरू करने से पहले, अस्पताल प्रबंधन सर्जनों की एक विशेषज्ञ टीम तैयार करने में जुटा है। इसके तहत, सर्जरी विभाग के डॉक्टरों के लिए सिमुलेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर दिया गया है। रोबोट बनाने वाली कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में डॉक्टर कंसोल के माध्यम से इस मशीन को संचालित करने की बारीकियां सीख रहे हैं। इस कड़े प्रशिक्षण को पूरा करने के बाद ही सर्जनों को मशीन संचालित करने के लिए ‘रोबोटिक ड्राइविंग लाइसेंस’ (विशेष प्रमाण पत्र) प्रदान किया जाएगा।
रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से मरीजों को अनगिनत फायदे होंगे। इस तकनीक में डॉक्टर एक कंसोल पर बैठकर रोबोटिक हाथों को नियंत्रित करते हैं। इसमें लगे 3D कैमरे की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों का 360-डिग्री का स्पष्ट और बड़ा दृश्य दिखाई देता है। इससे आंतों के कैंसर, लिवर, प्रोस्टेट और पेट की अन्य गंभीर बीमारियों के जटिल ऑपरेशन बेहद सटीकता से किए जा सकेंगे। चूंकि इसमें चीरा बहुत छोटा लगता है, इसलिए मरीज को पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले दर्द कम होता है, खून कम बहता है, संक्रमण का खतरा घटता है और वह बहुत जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट सकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के विशेष निर्देशों के तहत, इस सुविधा का लाभ महिलाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा। इसके लिए आईजीएमसी में कमला नेहरू अस्पताल (KNH) की महिला मरीजों के लिए 40 बेड विशेष रूप से आरक्षित किए गए हैं। केएनएच के स्त्री रोग विशेषज्ञों को भी रोबोटिक मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आईजीएमसी आकर अपनी मरीजों की इलेक्टिव और रोबोटिक सर्जरी कर सकें।
सर्जरी के साथ-साथ मरीजों की जांच को भी विश्वस्तरीय बनाने के लिए आईजीएमसी में 25 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक डायग्नोस्टिक लैब भी स्थापित की जा रही है। यह पूरी कवायद राज्य सरकार के 3,000 करोड़ रुपये के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत हिमाचल की 75 लाख की आबादी को एम्स (AIIMS) और पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध करवानी हैं।
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