शिमला, 30 मार्च: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लंबे समय से अटकी गैर-शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की दिशा में अब औपचारिक हलचल शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद यह तय किया गया है कि रिक्त पदों को भरने के लिए मामला राज्य सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बैठक में कहा कि विश्वविद्यालय जल्द ही खाली पड़े पदों को भरने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजेगा, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षक वर्ग की भर्ती लंबे समय से अटकी हुई है और इसका असर अब प्रशासनिक कामकाज पर साफ दिखने लगा है।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्ष 2020 में क्लर्क, जेओए-आईटी और अन्य श्रेणियों के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किए, शुल्क जमा किया, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद से यह पूरा मामला लगातार अनिश्चितता में बना हुआ है।
200 से ज्यादा खाली पदों का असर अब रोजमर्रा के कामकाज पर
हालांकि कार्यकारी परिषद की बैठक में रिक्त पदों की कोई आधिकारिक अंतिम संख्या साझा नहीं की गई, लेकिन पहले सामने आए आरटीआई आधारित आंकड़ों के अनुसार विश्वविद्यालय में 200 से अधिक गैर-शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
इन पदों के खाली रहने का असर अब विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के कामकाज पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रशासनिक शाखाएं, कार्यालय, विभाग और छात्र सेवाओं से जुड़ी इकाइयां स्टाफ की कमी के कारण अतिरिक्त दबाव झेल रही हैं। सबसे ज्यादा असर परीक्षा शाखा, फाइल निपटान, दस्तावेजी कार्य और छात्र सुविधा सेवाओं पर देखा जा रहा है।
कई जगहों पर अस्थायी व्यवस्थाओं या मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालकर काम चलाया जा रहा है। लेकिन विश्वविद्यालय के भीतर अब यह साफ माना जाने लगा है कि ऐसी व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती।
अब नजर सरकार की मंजूरी और अगली भर्ती प्रक्रिया पर
कार्यकारी परिषद ने साफ किया है कि भर्ती प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। यानी फिलहाल इसे भर्ती शुरू होने की घोषणा नहीं, बल्कि उस दिशा में उठाया गया पहला गंभीर प्रशासनिक कदम माना जाना चाहिए।
सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद ही विश्वविद्यालय इन पदों को भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर पाएगा। यही वजह है कि अब इस पूरे घटनाक्रम पर न सिर्फ नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों, बल्कि विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों की भी नजर बनी हुई है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि एचपीयू अब सिर्फ आंतरिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भर्ती को औपचारिक प्रशासनिक रास्ते पर आगे बढ़ाना चाहता है। 2020 की अधूरी भर्ती प्रक्रिया के बाद इंतजार कर रहे हजारों युवाओं के लिए अब अगला बड़ा कदम सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
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