शिमला, 4 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश में शनिवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहा। राज्य के कई मध्य और निचले इलाकों में बारिश जारी रही, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी रखते हुए साफ किया है कि यह मौसम सिर्फ एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है।
आईएमडी शिमला के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, 4 अप्रैल को राज्य के अधिकतर लो हिल्स, प्लेन्स और मिड हिल्स में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि हाई हिल्स में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि शिमला, कुफरी, नारकंडा, सोलंग वैली और सिस्सू जैसे पर्यटन स्थलों पर 3 अप्रैल से 6 अप्रैल तक कई बार बारिश या बर्फबारी के दौर देखने को मिल सकते हैं। इसी अवधि में दिन के तापमान में करीब 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट का अनुमान जताया गया है।
जमीनी असर भी कई जिलों में साफ दिखा। शिमला और धर्मशाला में रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि किन्नौर और लाहौल-स्पीति में ताजा बर्फबारी हुई। इसके अलावा कुल्लू, मंडी, चंबा, सोलन, कांगड़ा और सिरमौर के कई हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई। लाहौल-स्पीति में लगातार बर्फबारी के कारण सड़क यातायात प्रभावित हुआ और कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवाजाही पर एहतियाती रोक भी लगाई गई।
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ओलावृष्टि और गरज-चमक की चेतावनी
इस बार का ऑरेंज अलर्ट सिर्फ बारिश या बर्फबारी तक सीमित नहीं है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इसके साथ ही कई जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं, बिजली चमकने और गरज-चमक के साथ तूफानी मौसम की भी चेतावनी दी गई है।
इस चेतावनी का असर सिर्फ आम लोगों पर नहीं, बल्कि बागवानी और खेती पर भी पड़ सकता है। अप्रैल का महीना हिमाचल के कई बागवानी क्षेत्रों के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में ओलावृष्टि होने पर सेब और अन्य फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। आईएमडी के जिला-स्तरीय बुलेटिन में बागवानों के लिए सावधानी बरतने की सलाह भी शामिल है।
यह मौसम बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि मार्च के अंत तक हिमाचल में मौसम पहले ही काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में राज्य में 93.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 113.4 मिमी से करीब 17 फीसदी कम रही। इसके बावजूद अप्रैल की शुरुआत में अचानक ठंड, बारिश, ओले और बर्फबारी का यह दौर फिर से सक्रिय हो गया है, जो बताता है कि इस बार मौसम का वितरण काफी असामान्य बना हुआ है।
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सड़क, पर्यटन और आम जनजीवन पर असर
सबसे ज्यादा असर फिलहाल सड़क यातायात और पहाड़ी पर्यटन पर पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौल-स्पीति में बर्फबारी के कारण कम से कम 18 सड़कें प्रभावित हुईं, जिनमें दारचा-सर्चू और ग्रांफू-बटाल जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास हिमस्खलन-प्रवण इलाकों में पर्यटकों और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी एहतियाती रोक लगाई गई।
प्रशासन और मौसम विभाग ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा से पहले सड़क और मौसम की ताजा स्थिति जरूर जांच लें। शिमला जैसे मिड-हिल शहरों में भी लगातार बारिश, फिसलन, कम दृश्यता और बिजली-गरज के बीच ड्राइविंग जोखिम भरी हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहाड़ी सड़कों से परिचित नहीं हैं।
मौसम विभाग का 7-दिवसीय पूर्वानुमान यह भी संकेत देता है कि राहत तुरंत मिलने वाली नहीं है। 7 अप्रैल से एक और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसके कारण हिमाचल में अगले हफ्ते फिर से बारिश और बर्फबारी का नया दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में यह मौसम सिर्फ आज की खबर नहीं, बल्कि आने वाले कई दिनों तक असर डालने वाला व्यापक मौसम चक्र बन चुका है।
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