शिमला की फिजाओं में ठंड है, लेकिन विधानसभा के गलियारों में गर्मी बढ़ने वाली है। सोमवार, 16 फरवरी से हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। इस ‘सियासी दंगल’ के शुरू होने से ठीक पहले, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई है।
मकसद साफ है—सदन को अखाड़ा बनने से रोकना। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए लगता नहीं कि विपक्ष इस बार शांत बैठने के मूड में है।


सोमवार को क्या होगा? सोमवार दोपहर 2 बजे राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषण के साथ सत्र का आगाज होगा। यह साल का पहला सत्र है, इसलिए राज्यपाल सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे। लेकिन असली खबर पर्दे के पीछे की रणनीति है।
विपक्ष ने कस ली है कमर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और उनकी बीजेपी टीम पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने वाली है। विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं है:
- आर्थिक बदहाली: सरकार कह रही है खजाना खाली है, लेकिन HRTC अफसरों के लिए महंगे लैपटॉप खरीदे जा रहे हैं।
- नौकरियां: हजारों युवा रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, और नई भर्तियां फंसी पड़ी हैं।
- गारंटियां: 1500 रुपये और मुफ्त बिजली के वादे पर जनता सवाल पूछ रही है।
खबर है कि बीजेपी विधायक दल भी सोमवार को अपनी अलग बैठक करेगा, जिसमें सरकार को घेरने की फाइनल रणनीति बनेगी।
सरकार की मुश्किल और स्पीकर की कोशिश सुक्खू सरकार के लिए यह सत्र किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। एक तरफ केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद हो गया है, जिससे सैलरी और पेंशन पर संकट गहरा सकता है। सीएम सुक्खू चाहते हैं कि इस मुद्दे पर विपक्ष उनका साथ दे और केंद्र के खिलाफ ‘एक सुर’ में प्रस्ताव पास हो।
लेकिन पिछले हफ्ते जब सीएम ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई थी, तो बीजेपी ने उससे किनारा कर लिया था। अब स्पीकर कुलदीप पठानिया की कोशिश है कि कम से कम सदन के भीतर कार्यवाही सुचारू रूप से चले। उन्होंने दोनों पक्षों से अपील की है कि “विरोध करें, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखें।”
अब देखना दिलचस्प होगा कि सोमवार को जब सदन जुटेगा, तो चर्चा होगी या सिर्फ शोर-शराबा?
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