शिमला, 10 मार्च — हिमाचल प्रदेश दुग्ध संघ ने राज्य में छह नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन संयंत्रों का उद्देश्य दूध उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाना तथा दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों के अनुसार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में नए संयंत्र स्थापित होने से दूध संग्रहण और प्रसंस्करण व्यवस्था मजबूत होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादकों को अपने उत्पाद को आसानी से सहकारी नेटवर्क के माध्यम से बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
डेयरी ढांचे को मजबूत करने की पहल
राज्य सरकार और दुग्ध संघ का मानना है कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई किसान कृषि के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपनाते हैं।
नए संयंत्र स्थापित होने से दूध संग्रहण केंद्रों से प्रसंस्करण इकाइयों तक आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही दूध और उससे बने उत्पादों जैसे घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों के उत्पादन में भी वृद्धि संभव होगी।
दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा लाभ
हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान सहकारी समितियों के माध्यम से दूध की आपूर्ति करते हैं। यदि प्रसंस्करण क्षमता बढ़ती है तो संघ अधिक मात्रा में दूध खरीद सकेगा, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी राज्यों में डेयरी क्षेत्र ग्रामीण आय को स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग
हाल के वर्षों में पैकेज्ड दूध और डेयरी उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि देखी गई है। ऐसे में प्रसंस्करण संयंत्रों का विस्तार राज्य की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आसपास के बाजारों में आपूर्ति को भी मजबूत कर सकता है।
इस परियोजना से दूध संग्रहण, प्रसंस्करण, परिवहन और विपणन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
आगे की योजना
दुग्ध संघ द्वारा आने वाले समय में इन संयंत्रों के लिए स्थान और निर्माण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद राज्य के हजारों दुग्ध उत्पादकों को बेहतर विपणन और आय के अवसर मिलने की उम्मीद है।
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