शिमला, 20 मार्च: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महिला कर्मचारी तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 180 दिन के मातृत्व अवकाश की हकदार है और इसे बच्चों की संख्या के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश केवल सेवा शर्त नहीं बल्कि मां और बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जिसे किसी भी नियम के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक महिला कर्मचारी को तीसरे बच्चे के जन्म पर अवकाश देने से मना कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह का इनकार सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है।
मातृत्व अधिकारों पर अदालत की व्याख्या
अदालत ने कहा कि मातृत्व लाभ महिलाओं और बच्चों के संरक्षण से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों का हिस्सा हैं।
इसलिए इन अधिकारों की व्याख्या ऐसे की जानी चाहिए जिससे महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा मिल सके।
सरकारी नीतियों पर प्रभाव
इस फैसले के बाद राज्य की सेवा नियमावली में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है, खासकर उन नियमों में जहां मातृत्व अवकाश को सीमित किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
सरकार को अब अपनी नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि वे अदालत के निर्देशों के अनुरूप हों।
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