शिमला, 15 मार्च — हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी सेवा से इस्तीफा दे देता है, तो उसके परिवार को पारिवारिक पेंशन का अधिकार नहीं मिलता। अदालत ने इस मामले में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।
यह मामला उस कर्मचारी के परिवार की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें कर्मचारी की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन की मांग की गई थी। हालांकि संबंधित विभाग ने पहले ही इस मांग को सेवा नियमों के आधार पर अस्वीकार कर दिया था।
सेवा नियमों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा नियमों के अनुसार पारिवारिक पेंशन केवल उन मामलों में मिलती है जब कर्मचारी की मृत्यु सेवा के दौरान हो या वह नियमित रूप से सेवानिवृत्त हुआ हो।
अदालत ने कहा कि स्वैच्छिक इस्तीफा देने पर कर्मचारी की सेवा समाप्त मानी जाती है, जिससे पेंशन से जुड़े अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया था कि कर्मचारी ने लंबे समय तक सेवा की थी, इसलिए परिवार को पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। लेकिन अदालत ने कहा कि सेवा नियमों में स्पष्ट प्रावधान होने के कारण यह दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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इस्तीफा और सेवानिवृत्ति में अंतर
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस्तीफा और सेवानिवृत्ति दो अलग-अलग स्थितियां हैं। सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी को निर्धारित नियमों के अनुसार पेंशन मिलती है, जबकि इस्तीफा देने पर कई लाभ समाप्त हो जाते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जहां परिवार इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन का दावा करते हैं।
याचिका खारिज
सभी तथ्यों और सेवा नियमों का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि संबंधित विभाग ने नियमों के अनुसार ही निर्णय लिया था।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकारी सेवा में पेंशन और पारिवारिक पेंशन के दावे पूरी तरह से निर्धारित नियमों के आधार पर ही तय किए जाएंगे।
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