शिमला, 19 मार्च: हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 21 मार्च को 2026-27 का बजट विधानसभा में प्रस्तुत करेंगे और उसके बाद 23 मार्च को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है, सरकारी स्रोतों ने बताया।
विधानसभा का बजट सत्र 18 मार्च से चल रहा है और इसमें 13 बैठकों की रूपरेखा बनाई गई है; सदन को अब तक 800 से अधिक प्रश्न मिल चुके हैं, जिनका असर बजट बहस पर भी पड़ सकता है।
बजट की पृष्ठभूमि और आर्थिक वास्तविकता
पिछले बजट विश्लेषण बताते हैं कि राज्य की पूँजीगत व्यय (capital outlay) में पिछली वित्तीय अवधि में कमी दर्ज की गयी थी और राजस्व व्यय पर दबाव बना हुआ है। PRS के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में पूँजीगत व्यय घटा और राजस्व व्यय में समायोजन हुआ — यह किसी भी नए बड़े निवेश की क्षमता पर असर डालता है।
सरकार ने हाल ही में कुछ खर्चों पर कड़े कदम उठाए हैं — जैसे बोर्ड प्रमुखों को दिया गया कैबिनेट रैंक वापस लेना और कुछ वेतन घटकों या भुगतान को टाला जाना — जो वित्तीय अनुशासन लागू करने के संकेत हैं।
बजट में क्या अपेक्षा रखें
सरकारी अधिकारी कहते हैं कि इस बार का बजट आधारभूत ढांचा, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देगा, साथ ही इसका उद्देश्य कर्ज और घाटे को नियंत्रित करना होगा। विपक्ष पहले ही दावा कर चुका है कि कई घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं और वे इन्हीं मुद्दों को उठायेंगे।
राजनीतिक प्रक्रियाएँ और संभावित प्रभाव
भाजपा द्वारा दायर विशेषाधिकार नोटिस और सदन में उठाये गये सवालों के कारण स्पीकर के निर्णय और समिति की कार्यवाही बजट के क्रियान्वयन और समयरेखा को प्रभावित कर सकती है। इससे कुछ घोषणाओं का शीघ्र क्रियान्वयन भी धीमा पड़ सकता है।
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